
बिहार सरकार ने 1 जनवरी 2026 से जमीन के दस्तावेजों और जमाबंदी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (LRC) के इस क्रांतिकारी कदम से लाखों वारिसों को अब तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं। एक ही ऑनलाइन आवेदन से पूर्वजों की जमीन अपने नाम पर दर्ज कराने का सपना साकार हो गया है। नया ‘बिहार भूमि पोर्टल’ और ‘राजस्व महा अभियान’ ने पारंपरिक झंझट को जड़ से उखाड़ फेंका है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन विवादों में भारी कमी की उम्मीद है।
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प्रमुख बदलाव जो बदल देंगे जमीन रिकॉर्ड प्रक्रिया
राजस्व महा अभियान के तहत लॉन्च हुए इन सुधारों ने जमाबंदी (दाखिल-खारिज) को अभूतपूर्व सरल बना दिया। सबसे बड़ा बदलाव है ‘एक ही आवेदन से बंटवारा’। पहले परिवार के हर हिस्सेदार को अलग-अलग आवेदन देना पड़ता था, लेकिन अब एक सदस्य सभी वारिसों के नाम से जमाबंदी कायम करवा सकता है। यह सुविधा विशेष रूप से संयुक्त परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही।
1 जनवरी से कागजी कॉपियां बंद हो चुकी हैं। केवल डिजिटल हस्ताक्षर वाली दस्तावेज ही मान्य होंगे, जो biharbhumi.bihar.gov.in से डाउनलोड किए जा सकते हैं। वंशावली प्रमाण के आधार पर किसान अब ‘फार्मर आईडी’ बना सकेंगे, भले ही जमीन दादा-परदादा के नाम हो। इससे पीएम किसान, सब्सिडी योजनाओं का लाभ सीधे खाते में पहुंचेगा। इसके अलावा, ‘परिमार्जन प्लस पोर्टल’ पुरानी जमाबंदी की गलतियों को घर बैठे ठीक करने का मौका देता है।
नाम दर्ज कराने की आसान प्रक्रिया
प्रक्रिया शुरू करने के लिए biharbhumi.bihar.gov.in पर जाएं। ‘ऑनलाइन दाखिल-खारिज’ चुनें, जिला-ब्लॉक-गांव-खाता-खेसरा विवरण भरें। मृतक के मृत्यु प्रमाण पत्र, वंशावली और स्वघोषणा पत्र अपलोड करें। आवेदन जमा होने पर हल्का कर्मचारी और अंचल अधिकारी (CO) सत्यापन करेंगे। महा अभियान के तहत यह ‘मिशन मोड’ में तेज है, ज्यादातर मामलों में 15-30 दिनों में स्वीकृति मिल जाती। स्वीकृति के बाद नया खतियान और नक्शा ऑटोमैटिक जनरेट हो जाता।
विशेष बात: 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए 1 अप्रैल 2026 से ‘डोरस्टेप रजिस्ट्री’ शुरू होगी। अधिकारी घर जाकर दस्तावेज लेगें और नाम दर्ज करवाएंगे। यह सुविधा बुजुर्गों के लिए बड़ी राहत है।
जमाबंदी स्टेटस कैसे चेक करें?
अपनी जमीन की जमाबंदी संख्या या म्यूटेशन स्टेटस जानने के लिए पोर्टल पर ‘जमाबंदी विवरण’ या ‘दाखिल खारिज स्थिति’ सेक्शन में खाता-खेसरा नंबर डालें। खसरा मैप, लगान रसीद और मालिकाना हक की पूरी जानकारी तुरंत स्क्रीन पर आ जाएगी। यदि कोई त्रुटि हो, तो परिमार्जन प्लस से आवेदन करें।
प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
ये बदलाव न केवल समय बचाएंगे, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बिहार के 2.5 करोड़ से अधिक किसानों को फायदा होगा। पहले जमाबंदी में महीनों लगते थे, अब डिजिटल सिस्टम ने इसे हफ्तों में सिमटा दिया। हालांकि, डिजिटल साक्षरता की कमी वाले क्षेत्रों में जागरूकता अभियान जरूरी हैं। सरकार ने 2026 तक 100% डिजिटलीकरण का लक्ष्य रखा है।
क्या आप भी पूर्वजों की जमीन अपने नाम कराना चाहते हैं? तुरंत पोर्टल चेक करें और आवेदन करें। यह न केवल संपत्ति का हक दिलाएगा, बल्कि सरकारी योजनाओं का द्वार भी खोलेगा। बिहार भूमि 2026 ने साबित कर दिया, डिजिटल इंडिया अब गांव-गांव पहुंच चुका है!
















