कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पीएफ खातों पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर तय की है। यह दर पिछले दो वर्षों से अपरिवर्तित है, जो आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सैलरीड वर्ग के लिए सबसे मजबूत सहारा बन रही है। संगठन के केंद्रीय बोर्ड ने हाल ही में हुई बैठक में इस पर मुहर लगाई। वित्त मंत्रालय की अंतिम स्वीकृति मिलते ही यह ब्याज खातों में जुड़ना शुरू हो जाएगा। विशेषज्ञ इसे इस साल का सबसे आकर्षक रिटर्न मान रहे हैं, क्योंकि बैंक बचत या अन्य निवेश विकल्प इससे पीछे हैं।

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पीछे के वर्षों से बेहतर स्थिरता
पीएफ ब्याज दरें समय के साथ मजबूत बनी हुई हैं। दो साल पहले यह 8.15 प्रतिशत थी, जो अब 8.25 प्रतिशत पर टिक गई है। देशभर के करीब सात करोड़ सदस्यों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। खास बात यह है कि यह रिटर्न पूरी तरह सुरक्षित और कर मुक्त है। बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर औसतन छह से साढे सात प्रतिशत ही मिलता है, जबकि छोटी बचत योजनाओं में भी यह दर कम है। नौकरीपेशा लोग जो जोखिम से बचना चाहते हैं, उनके लिए पीएफ अब भी सबसे अच्छा विकल्प है। नियमित योगदान से रिटायरमेंट कोष तेजी से बढ़ता है।
ब्याज कब और कैसे जुड़ेगा?
आमतौर पर ईपीएफओ साल के अंत के कुछ महीनों बाद ब्याज जोड़ता है। इस बार जून से अगस्त तक यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है। नए नियमों के मुताबिक देरी होने पर भी पूरा लाभ मिलेगा। मासिक योगदान पर हिसाब लगता है, इसलिए जितना अधिक जमा, उतना ज्यादा फायदा। मान लीजिए सालाना पांच लाख रुपये का योगदान है, तो आठ हजार से ज्यादा का मासिक ब्याज बनेगा। सदस्यों को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर अपने खाते की जांच करें। इससे वेल्थ बढ़ाने की रणनीति मजबूत होती है।
मोबाइल से पल भर में बैलेंस जांच
डिजिटल युग में ईपीएफओ ने सुविधाएं बढ़ा दी हैं। सबसे आसान तरीका यमंग ऐप है। इसे प्ले स्टोर से डाउनलोड कर यूनिफाइड अकाउंट नंबर और ओटीपी से लॉगिन करें। फिर ईपीएफओ सेक्शन में पासबुक खोलें, बैलेंस सामने आ जाएगा। अगर ऐप न चले तो मिस्ड कॉल दें। अपने पंजीकृत नंबर से 9966044425 पर कॉल करें, तुरंत एसएमएस आ जाएगा। एसएमएस के लिए यूनिफाइड नंबर के साथ ईपीएफओएचओ लिखकर 7738299899 पर भेजें। वेबसाइट पर भी पासबुक सुविधा उपलब्ध है। आधार, पैन और बैंक विवरण लिंक रखना न भूलें, वरना दिक्कत हो सकती है।
क्यों खास है यह रिटर्न?
महंगाई के इस दौर में आठ प्रतिशत से ऊपर का रिटर्न वास्तविक बचत को सुरक्षित रखता है। छोटे शहरों के कर्मचारी जैसे उत्तराखंड या अन्य राज्यों में रहने वाले लोगों को इससे दोहरा फायदा है। सरकारी नौकरियों या प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले इसे रिटायरमेंट प्लानिंग का आधार बना सकते हैं। निकासी पर पाबंदी न होने से लचीलापन भी है, हालांकि बड़ी राशि पर टैक्स नियम लागू हो सकते हैं। भविष्य के लिए सुझाव है कि योगदान बढ़ाएं या अन्य योजनाओं के साथ जोड़ें।
होली की धूम में यह खबर कर्मचारियों के चेहरों पर मुस्कान ला रही है। अगर आपका खाता सक्रिय है तो आज ही जांच कर लें। अधिक अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट देखें।
















