
भारतीय कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) के माध्यम से एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत की है इस नई व्यवस्था के तहत, अब फसलों का सर्वे पटवारियों के रजिस्टर के बजाय सीधे मोबाइल ऐप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किया जा रहा है, इससे न केवल आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी, बल्कि आपदा की स्थिति में मिलने वाला मुआवजा भी बिना किसी बिचौलिए के सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचेगा।
Table of Contents
ऐप से सर्वे और जियो-टैगिंग की तकनीक
डिजिटल क्रॉप सर्वे में सर्वेक्षक या किसान स्वयं मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग कर खेत की जियो-टैग्ड (Geo-tagged) तस्वीरें और फसल का विवरण अपलोड करते हैं।
- जियो-फेंसिंग: तकनीक के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि डेटा उसी स्थान से लिया गया है जहां खेत स्थित है, जिससे फर्जी आंकड़ों की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
- सटीक आकलन: एआई और सैटेलाइट इमेजरी की मदद से अब मिश्रित खेती (Intercropping) का भी सटीक पता लगाना संभव हो गया है।
यूनिक फार्मर आईडी और डिजिटल रजिस्ट्री
सरकार एग्रीस्टैक (AgriStack) परियोजना के तहत हर किसान के लिए एक यूनिक फार्मर आईडी बना रही है।
- डाटा एकीकरण: इस आईडी को किसान के भूमि रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी) से जोड़ा जा रहा है。
- वर्तमान प्रगति: फरवरी 2026 तक देश भर में करोड़ों किसानों की आईडी बनाई जा चुकी है, जिसका लक्ष्य 2026-27 तक 11 करोड़ किसानों को जोड़ना है।
किसानों को मिलने वाले मुख्य लाभ
- फसल नुकसान होने पर डिजिटल डेटा के आधार पर बीमा कंपनियां तुरंत नुकसान का आकलन कर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का क्लेम सीधे खातों में भेज सकेंगी।
- डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर किसान अब मात्र 15-20 मिनट में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
- पीएम-किसान सम्मान निधि, खाद सब्सिडी और अन्य सरकारी लाभों का वितरण अब अधिक सटीक और तेज हो गया है।
विभिन्न राज्यों में सक्रियता
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में इस सर्वे का काम तेजी से चल रहा है, राजस्थान में किसान Raj Kisan App और मध्य प्रदेश में MP Kisan App के जरिए स्वयं भी अपनी फसल की जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
















