देशभर में रसोई गैस की कमी से आम लोगों बहुत परेशान हो रहें हैं। विदेशी तेल बाजार की अस्थिरता से एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। ऐसे में राशन दुकानदार संगठनों ने सरकार से अनुरोध किया है कि PDS के जरिए केरोसिन तेल फिर से उपलब्ध कराया जाए। यह मांग पीएमओ तक पहुंच गई है और गांवों के परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।

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एलपीजी की कमी से उपजी चुनौती
वैश्विक तनावों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। भारत जैसे आयातक देश के लिए यह मारक साबित हो रहा है। उज्ज्वला योजना से लाखों परिवार गैस पर निर्भर हो चुके हैं, लेकिन अब सिलेंडर समय पर न मिलने से लोग परेशान हैं। खासकर गांवों में चूल्हा तो चलता ही है, पर ईंधन की कमी ने हालात और कठिन कर दिए। राशन दुकानदारों का कहना है कि केरोसिन को सस्ते दाम पर बहाल करने से तत्काल समाधान मिलेगा। पहले यह तेल सब्सिडी पर आसानी से मिल जाया करता था।
सरकार की ओर से क्या कदम
पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। स्टॉक की निगरानी के लिए आवश्यक वस्तु कानून सख्ती से लागू हो रहा है। हालांकि केरोसिन वितरण पर अभी अंतिम फैसला बाकी है। दुकानदार संगठन ने सुझाव दिया है कि पांच लाख राशन दुकानों का नेटवर्क तुरंत वितरण संभाल सकता है। ग्रामीण महिलाओं को इससे सबसे ज्यादा फायदा होगा, जहां ब्लैक मार्केटिंग का बोलबाला है। सरकार वैकल्पिक आयात स्रोत भी तलाश रही है।
पहले क्यों बंद हुआ था केरोसिन
पीएम उज्ज्वला और स्वच्छ ऊर्जा अभियान के तहत 2020 के आसपास कई राज्यों में केरोसिन का वितरण थम गया। सब्सिडी सीधे बैंक खातों में डाली जाने लगी। मिट्टी का तेल कभी रसोई का राजा था, लेकिन इंडक्शन और गैस ने इसे बाजार से बाहर कर दिया। कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर इसे फिर शुरू करने की कोशिश हुई, पर राष्ट्रीय स्तर पर रुका रहा। अब संकट ने इसे फिर सुर्खियों में ला दिया।
आगे की राह क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक उपाय के तौर पर केरोसिन जरूरी है, भले ही पर्यावरणीय नुकसान की आशंका हो। वन नेशन वन राशन कार्ड योजना को मजबूत कर इसे शामिल किया जा सकता है। फिलहाल मांग पर विचार चल रहा है और सरकारी स्तर पर तैयारी तेज हो गई है। गरीबों के रसोईघर में रोशनी लौटाने की यह मांग सफल हो, यही उम्मीद है।
















