
लोक आस्था और सूर्य उपासना का पावन महापर्व ‘चैती छठ’ साल 2026 में 22 मार्च से शुरू होने जा रहा है चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन अनुष्ठान को लेकर श्रद्धालुओं में अभी से उत्साह देखा जा रहा है, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर सप्तमी तिथि तक चलने वाले इस पर्व में भगवान भास्कर और छठी मैया की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
Table of Contents
चार दिवसीय महापर्व का शेड्यूल
धार्मिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चैती छठ का कैलेंडर इस प्रकार रहेगा:
- 22 मार्च (रविवार) – नहाय-खाय: महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होगी। इस दिन व्रती पवित्र स्नान के बाद सात्विक कद्दू-भात का भोग ग्रहण कर व्रत का संकल्प लेंगे।
- 23 मार्च (सोमवार) – खरना: दूसरे दिन श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर शाम को मिट्टी के चूल्हे पर बनी गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके बाद 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत प्रारंभ हो जाएगा।
- 24 मार्च (मंगलवार) – संध्या अर्घ्य: महापर्व के तीसरे दिन अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा विभिन्न छठ घाटों पर श्रद्धालु शाम 06:40 बजे सूर्य देव को पहला अर्घ्य अर्पित करेंगे।
- 25 मार्च (बुधवार) – उषा अर्घ्य: महापर्व का समापन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा, सुबह 05:47 बजे सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के बाद व्रती पारण करेंगे और व्रत पूर्ण होगा।
यह भी देखें: 18 साल का इंतजार खत्म! अब 16 की उम्र में ही बन जाएगा ड्राइविंग लाइसेंस; सरकार ने बदला नियम, जानें क्या है प्रक्रिया?
प्रशासनिक तैयारी और महत्व
चैती छठ को लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। राजधानी पटना में गंगा किनारे स्थित घाटों की साफ-सफाई और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैती छठ का व्रत करने से परिवार में सुख-शांति और संतान की उन्नति होती है। हालांकि शारदीय छठ की तुलना में चैती छठ करने वाले व्रतियों की संख्या कम होती है, लेकिन इसकी पवित्रता और नियम उतने ही कठोर होते हैं।
















