
अगर आप भी अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने और टैक्स बचाने के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है, वित्त मंत्रालय ने पीपीएफ खातों को लेकर नियमों को बेहद सख्त कर दिया है, अगर आपके पास एक से ज्यादा पीपीएफ खाते हैं, तो 1 अक्टूबर 2024 से लागू हुए नए नियम आपकी जमा पूंजी पर मिलने वाले ब्याज को ‘जीरो’ कर सकते हैं।
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एक नाम पर दो खाते? अब खैर नहीं!
पीपीएफ के नियमों के मुताबिक, भारत में कोई भी नागरिक अपने नाम पर केवल एक ही पीपीएफ खाता रख सकता है, इसके बावजूद, कई लोग अनजाने में या अधिक ब्याज के लालच में अलग-अलग बैंकों या डाकघरों में दो खाते खुलवा लेते हैं, वित्त मंत्रालय के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब ऐसे ‘अनियमित’ खातों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
ब्याज पर लगेगा ‘ब्रेक’, हाथ आएगा सिर्फ मूलधन
नए नियमों के तहत, यदि किसी व्यक्ति के पास दो खाते पाए जाते हैं, तो उनमें से केवल एक (प्राथमिक खाता) ही वैध माना जाएगा, दूसरे खाते का भविष्य अब खतरे में है:
- जीरो फीसदी ब्याज: दूसरे या अतिरिक्त खाते में जमा राशि पर खाता खुलने की तारीख से कोई ब्याज नहीं दिया जाएगा।
- विलय की शर्त: अतिरिक्त खाते को प्राथमिक खाते में तभी मर्ज किया जा सकेगा, जब दोनों का कुल निवेश सालाना 1.5 लाख रुपये की सीमा के भीतर हो।
- रिफंड का नियम: यदि आपने लिमिट से ज्यादा पैसा जमा किया है, तो अतिरिक्त राशि आपको बिना किसी ब्याज के वापस कर दी जाएगी।
नाबालिगों के खातों पर भी कड़ी नजर
अक्सर अभिभावक अपने बच्चों के नाम पर भी पीपीएफ खाता खुलवाते हैं, नियम स्पष्ट है कि एक अभिभावक और उसके नाबालिग बच्चे के खातों को मिलाकर भी निवेश की अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपये ही होनी चाहिए, अगर यह सीमा पार होती है, तो अतिरिक्त राशि पर ब्याज का नुकसान उठाना पड़ेगा।
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बचना है तो अभी करें ये काम
अगर आपके पास भी दो खाते हैं, तो भारी नुकसान से बचने के लिए तुरंत ये कदम उठाएं:
- अपने बैंक या डाकघर शाखा में जाकर खातों की जानकारी दें।
- दोनों खातों को मर्ज (Merge) करने के लिए लिखित आवेदन जमा करें।
- यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में केवल एक ही पीपीएफ नंबर पर निवेश जारी रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम वित्तीय अनुशासन लाने और सब्सिडी वाले ब्याज के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है अपनी बचत को सुरक्षित रखने के लिए समय रहते इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
















