उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे देश का पहला सोलर एक्सप्रेसवे बनने को तैयार है। 296 किलोमीटर लंबे इस हाईवे के किनारे सोलर पैनल लगाकर 550 मेगावाट बिजली पैदा की जाएगी। इससे करीब 1 लाख घर रोशन हो सकेंगे और ग्रीन एनर्जी में यूपी का बड़ा धमाका होगा।

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परियोजना का खाका और डिजाइन
यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर 15-20 मीटर चौड़ी पट्टी पर कुल 1700 हेक्टेयर जमीन का उपयोग होगा। यहां 450 से 550 मेगावाट क्षमता वाले सोलर पार्क स्थापित होंगे। बुंदेलखंड क्षेत्र का शुष्क मौसम, जहां सालाना 800-900 मिमी बारिश होती है, सोलर एनर्जी उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है। चित्रकूट से इटावा तक फैला यह कॉरिडोर न केवल तेज रफ्तार वाली यात्रा देगा, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत भी बनेगा।
विकास की प्रगति और निवेश
फरवरी 2026 तक प्रोजेक्ट ने तेजी पकड़ ली है। ग्लोबल एनर्जी अलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट (जीईएपीपी) की फिजिबिलिटी स्टडी पूरी होने के बाद अक्टूबर 2024 में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी की गई। आठ प्रमुख सोलर डेवलपर्स ने बोली लगाई। 25 साल के बिल्ड-ओन-ऑपरेट (बीओओ) मॉडल पर चलने वाली इस योजना की अनुमानित लागत 1800 करोड़ रुपये है। बिजली उत्पादन की दर 4 से 4.50 रुपये प्रति यूनिट रहेगी। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन और एक्सप्रेसवे का विद्युतीकरण भी शामिल है। यूपी की सोलर पॉलिसी के तहत 2026-27 तक 22,000 मेगावाट लक्ष्य का अहम हिस्सा बनेगा यह प्रोजेक्ट।
आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव
यह सोलर एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड के पिछड़े इलाके को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। स्थानीय स्तर पर हजारों रोजगार सृजित होंगे, खासकर युवाओं और किसानों के लिए। सस्ती और स्वच्छ बिजली से आसपास के गांव आत्मनिर्भर बनेंगे। पर्यावरण के लिहाज से यह कोयला आधारित बिजली संयंत्रों का मजबूत विकल्प साबित होगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। देश के कुल 6000 किलोमीटर एक्सप्रेसवे नेटवर्क पर 10 गीगावाट सोलर पोटेंशियल अनलॉक करने का मॉडल बनेगा।
भविष्य की संभावनाएं
योगी आदित्यनाथ सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को रिन्यूएबल एनर्जी हब के रूप में स्थापित करेगा। बुंदेलखंड जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्र में कनेक्टिविटी के साथ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी। निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाएंगे। कुल मिलाकर, सोलर एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा को तेज बनाएगा, बल्कि भारत की ग्रीन एनर्जी क्रांति को नई गति देगा। यह प्रोजेक्ट विकास और पर्यावरण के संतुलन का प्रतीक बनेगा।
















