
देशभर के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा झटका देने वाली खबर सामने आ रही है, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा बिजली नियमों में किए जा रहे बदलावों के चलते अब आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है, नए प्रस्तावों और ड्राफ्ट पॉलिसी के अनुसार, मध्यम वर्गीय परिवारों के बिजली बिल में हर महीने ₹200 से लेकर ₹600 तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
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क्यों महंगा होगा बिजली का बिल?
विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली बिल में इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह Electricity (Amendment) Bill और Draft National Electricity Policy (NEP) 2026 के कड़े प्रावधान हैं। सरकार का लक्ष्य बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) के बढ़ते घाटे को कम करना है, जिसके लिए अब सीधे उपभोक्ताओं से ‘कॉस्ट-रिफ्लेक्टिव टैरिफ’ यानी बिजली उत्पादन की वास्तविक लागत वसूलने की तैयारी है।
इन 3 बदलावों से बढ़ेगा आपका खर्च
- नए नियमों के तहत अब बिजली की दरें हर साल महंगाई दर (WPI/CPI) के आधार पर अपने आप बढ़ जाएंगी, इसके लिए राज्य नियामकों की मंजूरी का इंतजार नहीं करना होगा।
- कई राज्यों में मुफ्त बिजली की सीमा (जैसे 200-300 यूनिट) को तर्कसंगत बनाने की चर्चा है, अगर सब्सिडी कम होती है, तो बिल में सीधा उछाल आएगा।
- रात के समय (पीक आवर्स) बिजली का उपयोग करना अब महंगा पड़ेगा, सरकार दिन के समय (सौर ऊर्जा घंटों) में दरें कम रखेगी, लेकिन रात के समय 10% से 20% तक एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा।
राज्यों में हलचल तेज
उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बिजली कंपनियों ने पहले ही टैरिफ में 25% से 30% तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है, दिल्ली में भी उन उपभोक्ताओं की सब्सिडी पर कैंची चल सकती है जिनका मीटर चालू है लेकिन खपत शून्य रहती है।
कब से लागू होंगे नियम?
माना जा रहा है कि इनमें से अधिकांश संशोधन और नए चार्ज 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो सकते हैं, इस कदम से जहाँ सरकार सेक्टर को मजबूत करने का दावा कर रही है, वहीं आम आदमी इसे कमरतोड़ महंगाई के रूप में देख रहा है।
















