
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का तीन दिवसीय बिहार दौरा आज तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है। बुधवार से शुरू यह यात्रा मुख्य रूप से सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा समीक्षा और विकास कार्यों पर केंद्रित बताई जा रही है, लेकिन आरजेडी विधायक रणविजय साहू के एक बड़े दावे ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। साहू ने आरोप लगाया है कि शाह इसी दौरे पर बिहार के सीमांचल क्षेत्र और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को काटकर नया केंद्र शासित प्रदेश या राज्य बनाने की योजना पर चर्चा करने आए हैं। उनका दावा है कि इससे ममता बनर्जी और विपक्ष का “बड़ा वोट बैंक” कट जाएगा। यह बयान बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले आया है, जिससे सियासी बहस तेज हो गई है।
अमित शाह का दौरा वास्तव में सीमांचल के सात जिलों- अररिया, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, सहरसा, सुपौल और मधुबनी – पर केंद्रित है। वे भारत-बांग्लादेश व नेपाल सीमा पर घुसपैठ, अवैध धार्मिक निर्माणों और जनसांख्यिकीय बदलावों की समीक्षा कर रहे हैं। ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2’ के तहत सीमा गांवों का विकास भी एजेंडे में है। भाजपा ने रणविजय साहू के दावे को खारिज करते हुए इसे “सियासी स्टंट” बताया है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह वोट ध्रुवीकरण की रणनीति है।
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कौन से जिले होंगे प्रभावित?
चर्चा मुख्य रूप से बिहार के तीन जिलों- किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार- तथा पश्चिम बंगाल के तीन जिलों – उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और दार्जिलिंग- पर है। ये जिले भौगोलिक रूप से सटे हुए हैं और सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के निकट स्थित हैं, जो सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। किशनगंज दार्जिलिंग से सटा है, जबकि उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर पूर्णिया व कटिहार से लगते हैं। यदि नया प्रशासनिक इकाई बनी, तो ये छह जिले सीधे प्रभावित होंगे। कुछ रिपोर्ट्स में बंगाल के मालदा जिले का भी जिक्र है, लेकिन मुख्य फोकस इन्हीं पर है।
यह प्रस्ताव घुसपैठ रोकने और जनसांख्यिकी संतुलन के नाम पर उठाया जा रहा है। बिहार के सीमांचल में बांग्लादेशी घुसपैठ के पुराने आरोप हैं, जिससे मुस्लिम आबादी में वृद्धि का दावा किया जाता है। केंद्र सरकार का लक्ष्य “घुसपैठिया मुक्त बिहार” है।
हिंदू-मुस्लिम आबादी का संवेदनशील गणित
रणविजय साहू का “वोट बैंक कटेगा” बयान इन जिलों की धार्मिक जनसांख्यिकी पर इशारा करता है। 2011 जनगणना के आंकड़ों के आधार पर स्थिति कुछ इस प्रकार है:
| जिला | राज्य | कुल आबादी (लगभग) | हिंदू % | मुस्लिम % | अन्य % |
|---|---|---|---|---|---|
| किशनगंज | बिहार | 19 लाख | 31.43% | 68% | 0.57% |
| पूर्णिया | बिहार | 37 लाख | 60.94% | 38.46% | 0.60% |
| कटिहार | बिहार | 37 लाख | 68% | 31.43% | ~0.57% |
| उत्तर दिनाजपुर | बंगाल | 32 लाख | 49.31% | 49.92% | 0.56% |
| दक्षिण दिनाजपुर | बंगाल | 17 लाख | 73.55% | 24.63% | 1.82% |
| दार्जिलिंग | बंगाल | 18 लाख | 74% (हिंदू+बौद्ध) | 5.69% | 20% |
किशनगंज स्पष्ट रूप से मुस्लिम बहुल है, जहां 13 लाख मुस्लिम और 6 लाख हिंदू हैं। उत्तर दिनाजपुर में आबादी बराबर है, जबकि अन्य जिले हिंदू बहुल। बंगाल के इन जिलों में मुस्लिम वोट टीएमसी के लिए निर्णायक माने जाते हैं। बिहार में भी ये इलाके विपक्ष के मजबूत आधार हैं। यदि पुनर्गठन हुआ, तो वोट पैटर्न बदल सकता है।
राजनीतिक निहितार्थ और चुनौतियां
यह मुद्दा बंगाल चुनाव से पहले भाजपा के लिए लाभकारी हो सकता है, जहां घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख हैं। शाह ने सीमांचल में कहा कि बंगाल में भाजपा सरकार बनेगी और घुसपैठियों को निकाला जाएगा। आरजेडी इसे सवर्ण-मुस्लिम ध्रुवीकरण का आरोप लगाती है।
हालांकि, कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। संविधान अनुच्छेद 3 के तहत राज्य पुनर्गठन संसद की मंजूरी से होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल सियासी हथियार है। बिहार में नीतीश-भाजपा गठबंधन के बीच भी राज्यसभा सीटों पर तनाव है।
















