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New State Demand: क्या बिहार-बंगाल के कुछ हिस्सों से बनेगा नया राज्य? जानें किन 5 जिलों की चर्चा और आबादी का पूरा गणित

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 25 फरवरी से शुरू तीन दिवसीय बिहार दौरा सीमांचल के किशनगंज-अररिया-पूर्णिया पर केंद्रित है। आरजेडी विधायक रणविजय साहू के दावे ने सियासत गरमा दी - बिहार-बंगाल के सीमावर्ती जिलों से नया राज्य बनेगा, जो ममता और महागठबंधन के वोट बैंक को चोट पहुंचाएगा। छह जिलों में मुस्लिम आबादी प्रमुख, घुसपैठ का मुद्दा गर्म। क्या बनेगा नया केंद्र शासित प्रदेश?

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New State Demand: क्या बिहार-बंगाल के कुछ हिस्सों से बनेगा नया राज्य? जानें किन 5 जिलों की चर्चा और आबादी का पूरा गणित

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का तीन दिवसीय बिहार दौरा आज तीसरे और अंतिम चरण में है। 25 फरवरी से शुरू यह यात्रा मुख्य रूप से सीमांचल क्षेत्र के किशनगंज, अररिया और पूर्णिया पर केंद्रित रही, जहां उन्होंने भारत-नेपाल सीमा सुरक्षा, घुसपैठ रोकथाम और विकास योजनाओं की समीक्षा की। लेकिन दौरे के बीच आरजेडी विधायक रणविजय साहू का दावा सुर्खियों में छा गया कि बिहार के सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को काटकर नया राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बनेगा। उन्होंने कहा, “अमित शाह इसी मकसद से बिहार आए हैं, इससे ममता बनर्जी और हमारा बड़ा वोट बैंक कट जाएगा।” इस बयान ने सियासी बवाल मचा दिया है।

पुरानी मांग का नया दौर

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने 2024 में संसद में इसी तरह की मांग उठाई थी, जिसमें बंगाल के मालदा-मुर्शिदाबाद, बिहार के अररिया-किशनगंज-कटिहार और झारखंड के संथाल परगना को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की बात कही गई। रणविजय साहू का दावा इससे जुड़ता नजर आता है, जो अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव पर आधारित है। लेकिन अब चर्चा छह जिलों तक फैल गई- बिहार के किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और बंगाल के उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, दार्जिलिंग। ये जिले आपस में सटे हैं और नेपाल-बांग्लादेश सीमा से लगे हैं।

प्रभावित इलाके कौन से?

सीमांचल क्षेत्र लंबे समय से अलग राज्य की मांग का केंद्र रहा है। 1992 से प्रस्तावित ‘सीमांचल राज्य’ में मूल रूप से बिहार के अररिया, किशनगंज, कटिहार शामिल थे, पर्निया को राजधानी बनाने की बात थी। अब बंगाल के जिले भी जोड़े जा रहे हैं। रणविजय साहू के अनुसार, ये बदलाव मुस्लिम बहुल इलाकों को लक्षित करेगा। यदि नया प्रशासनिक इकाई बनी, तो बिहार के पूर्वी और बंगाल के उत्तरी जिले सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। दार्जिलिंग पहाड़ी इलाका होने से अलग रहेगा, लेकिन उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर सीधे बिहार से सटे हैं।

अमित शाह के दौरे का फोकस

अमित शाह का दौरा भी इन्हीं जिलों पर फोकस्ड था। 25 फरवरी को किशनगंज में दो घंटे की बैठक, 26 को अररिया में लेट्टी सीमा चौकी का उद्घाटन और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की समीक्षा, तथा आज पूर्णिया में अंतिम बैठक। इन बैठकों में घुसपैठ, सुरक्षा और जनसांख्यिकीय आंकड़ों पर चर्चा हुई, जो नई राज्य मांग से जुड़ती प्रतीत होती है।

आबादी का संवेदनशील गणित

मांग का मूल बिंदु जनसांख्यिकी है। 2011 जनगणना के आधार पर इन जिलों में मुस्लिम आबादी प्रमुख है, जो घुसपैठ से प्रभावित मानी जाती है।

जिलाराज्यकुल आबादी (2011)हिंदू (%)मुस्लिम (%)अन्य (%)
किशनगंजबिहार16,90,40031.4368.000.57
पूर्णियाबिहार~32 लाख60.9438.46
कटिहारबिहार30,71,02968.0031.43
उत्तर दिनाजपुरप. बंगाल~32 लाख49.3149.920.56
दक्षिण दिनाजपुरप. बंगाल~16.5 लाख73.5524.63
दार्जिलिंगप. बंगाल~18.4 लाखबहुलकमबौद्ध/ईसाई

कुल मिलाकर इन छह जिलों की आबादी करीब 1.5 करोड़ से अधिक है, जिसमें मुस्लिम शेयर 40-50% तक। किशनगंज और उत्तर दिनाजपुर मुस्लिम बहुल हैं, जबकि दक्षिण दिनाजपुर हिंदू बहुल। पूर्णिया-कटिहार में संतुलन है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में मुस्लिम आबादी बढ़ी है। निशिकांत दुबे ने आदिवासियों की विस्थापना का हवाला दिया। यदि नया राज्य बना, तो वोट बैंक प्रभावित होंगे – बिहार में महागठबंधन और बंगाल में टीएमसी का।

सियासी संभावनाएं व चुनौतियां

यह मांग नई नहीं। 2009 में केंद्र को 10 नए राज्यों की मांग मिली थी। लेकिन संविधान संशोधन, राज्य विधानसभाओं की सहमति और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी जरूरी। बंगाल सीएम ममता बनर्जी इसका विरोध करेंगी, जबकि बिहार में नीतीश-चिराग गठबंधन असहज। आरजेडी इसे साजिश बता रही, बीजेपी चुप्पी साधे है।

विकास के लिहाज से फायदा हो सकता है- बेहतर सीमा प्रबंधन, वाइब्रेंट विलेज जैसी योजनाएं मजबूत होंगी। लेकिन सामाजिक तनाव बढ़ने का खतरा। अमित शाह के दौरे से सियासत गरम है, पर केंद्र से कोई आधिकारिक बयान नहीं। क्या यह महज अटकलें हैं या वास्तविक कदम? समय जवाब देगा। 

Author
info@gurukulbharti.in

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