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Land Record: सरकार के बाद भारत में सबसे ज्यादा जमीन का मालिक कौन? चर्च या वक्फ बोर्ड? नाम जानकर उड़ जाएंगे आपके होश

सरकार, चर्च या वक्फ बोर्ड – असली बादशाह कौन है, जो चुपचाप लाखों एकड़ जमीन का मालिक बना बैठा है? सच्चाई जानकर आप हैरान रह जाएंगे, पूरा सच जानने के लिए आगे ज़रूर पढ़ें।

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भारत में अगर जमीन के सबसे बड़े मालिक की बात की जाए, तो तस्वीर आम धारणाओं से काफी अलग निकलती है। लोग अक्सर बड़े उद्योगपति, राजा-महाराजा या किसी खास समुदाय का नाम लेते हैं, जबकि असल में सबसे ऊपर सरकार और उसके बाद कुछ बड़े धार्मिक-सामाजिक संस्थान आते हैं। इस पूरे समीकरण को समझने के लिए हमें सरकारी, चर्च और वक्फ जैसी संपत्तियों की परतें खोलकर देखनी पड़ती हैं।

Land Record: सरकार के बाद भारत में सबसे ज्यादा जमीन का मालिक कौन? चर्च या वक्फ बोर्ड? नाम जानकर उड़ जाएंगे आपके होश

पहला और सबसे बड़ा मालिक

भारत में जमीन का सबसे बड़ा मालिक कोई व्यक्ति या प्राइवेट कंपनी नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारें हैं। अलग-अलग मंत्रालयों, विभागों, बोर्डों और उपक्रमों के नाम पर दर्ज जमीन मिलकर एक बेहद विशाल हिस्सा बना देती है। बड़ी परियोजनाओं, सरकारी कॉलोनियों, ऑफिस परिसरों, रेलवे नेटवर्क, सैन्य ठिकानों और हाइवे जैसी संरचनाओं की वजह से सरकारी जमीन का दायरा पूरे देश में फैला हुआ है।

सरकारी जमीन भी समान रूप से बंटी नहीं होती, बल्कि कुछ मंत्रालय इसके बड़े हिस्से पर काबिज रहते हैं। रेलवे मंत्रालय के पास ट्रैक, स्टेशन, यार्ड, वर्कशॉप और स्टाफ कॉलोनियों के नाम पर फैली जमीन का बड़ा नेटवर्क है। रक्षा से जुड़े इलाकों में सैन्य छावनियां, प्रशिक्षण केंद्र, एयरबेस, आयुध डिपो और नौसैनिक ठिकाने विशाल भूभाग घेरते दिखाई देते हैं। इसके अलावा खनन, ऊर्जा, सिंचाई, परिवहन, उद्योग और अवसंरचना मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाली योजनाओं के लिए भी बड़े पैमाने पर जमीन आरक्षित रहती है।

शहरों की तस्वीर से समझिए सरकारी पकड़

अगर आप किसी बड़े शहर का नक्शा दिमाग में लाएं, तो सरकारी जमीन की वास्तविक ताकत का अंदाज़ा और साफ हो जाता है। एक ओर रेलवे स्टेशन और उसके आसपास फैली पटरी, यार्ड और कॉलोनियां दिखती हैं, तो दूसरी ओर पुरानी सैन्य छावनियां, सरकारी दफ्तरों के कंपाउंड, सरकारी अस्पताल और विश्वविद्यालय कैंपस नजर आते हैं। कई शहरों में तो ऐसा लगता है कि आधा से ज्यादा अहम इलाका किसी न किसी सरकारी विभाग के नाम पर दर्ज है, बस आम लोगों को उस पर मालिकाना हक नहीं दिखता, इसलिए यह बात सामान्य चर्चा में नहीं आती।

गैर-सरकारी बड़े मालिक, चर्च की संपत्तियां

सरकार के बाद गैर-सरकारी जमीन मालिकों की बात की जाए, तो अक्सर कैथोलिक चर्च और उससे जुड़े संस्थानों का नाम सामने आता है। अलग-अलग राज्यों में चर्च से संबंधित ट्रस्ट और संस्थाओं के पास शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के नाम पर काफी जमीन पाई जाती है। इन जमीनों पर बने स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, कॉन्वेंट, होस्टल, वृद्धाश्रम और धार्मिक भवन दशकों से स्थानीय समाज का हिस्सा बने हुए हैं।

औपनिवेशिक दौर में चर्च और मिशनरी काम से जुड़ी संस्थाओं को कई जगहों पर रियायती दरों पर या लंबी लीज़ पर जमीन दी जाती रही। आजादी के बाद भी इन संपत्तियों पर चर्च और उससे जुड़े संगठनों का संचालन जारी रहा। समय के साथ शहरीकरण बढ़ने पर इन जमीनों की लोकेशन और कीमत दोनों का महत्व और बढ़ गया, इसलिए अब इनके स्वामित्व और उपयोग पर बहस और विवाद भी अकसर सामने आते रहते हैं।

तीसरा बड़ा नाम, वक्फ से जुड़ी जमीनें

जमीन के बड़े मालिकों की सूची में एक अहम नाम वक्फ संपत्तियों का भी आता है। वक्फ उस संपत्ति को कहा जाता है, जो इस्लामी परंपरा के तहत किसी धार्मिक, शैक्षणिक या सामाजिक कल्याण के उद्देश्य से दान या वसीयत कर दी जाती है। अलग-अलग राज्यों में बने वक्फ बोर्ड इन संपत्तियों का रिकॉर्ड रखने, देखरेख करने और उनसे होने वाली आमदनी को तय उद्देश्यों पर खर्च करने की जिम्मेदारी निभाते हैं।

वक्फ संपत्तियों में मस्जिदें, मदरसे, कब्रिस्तान, दरगाहें और उनसे जुड़ी दुकानें, मकान, प्लॉट और खेती योग्य जमीन शामिल हो सकती हैं। कई शहरों में मुख्य बाज़ारों, पुरानी बस्तियों और प्रमुख चौराहों के आसपास वक्फ के नाम पर दर्ज दुकानें और इमारतें मिल जाती हैं। कागज़ों में यह सब धार्मिक-सामाजिक उपयोग के लिए दर्ज होता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इनसे होने वाली आय, पारदर्शिता और प्रबंधन पर सवाल अक्सर उठते रहते हैं।

आंकड़ों की उलझन और बड़ी तस्वीर

जब सवाल आता है – “किसके पास कितनी जमीन है?” – तो एकदम सटीक और आधिकारिक संख्या सामने रखना आसान नहीं होता। अलग-अलग रिपोर्ट, सर्वे, आयोगों की सिफारिशें और मीडिया में आई खबरें अपनी-अपनी तरह से अनुमान पेश करती हैं। कहीं सरकारी संपत्ति का आकलन ज्यादा दिखता है, कहीं चर्च की जमीनों के दावों पर जोर होता है, तो कहीं वक्फ संपत्तियों की संख्या चर्चा में रहती है।

फिर भी मोटे तौर पर तस्वीर यही बनती है कि सबसे ऊपर केंद्र और राज्य सरकारें, यानी पूरा सरकारी तंत्र, जमीन के सबसे बड़े मालिक के रूप में खड़ा है। इसके नीचे बड़े धार्मिक-सामाजिक संस्थान आते हैं, जिनमें चर्च जैसी संस्थाएं शिक्षा और स्वास्थ्य नेटवर्क के कारण विशाल संपत्ति संचालित करती हैं। उसी कतार में वक्फ बोर्ड और अन्य धार्मिक ट्रस्ट भी शामिल हैं, जो ऐतिहासिक, धार्मिक और सामाजिक कारणों से बड़े भूभाग पर मालिकाना हक रखते हैं। यही मिश्रण मिलकर बताता है कि भारत में जमीन का खेल सिर्फ अमीर व्यक्तियों का नहीं, बल्कि संस्थाओं और व्यवस्थाओं का है, जो पीढ़ियों से चलती आ रही हैं।

Author
info@gurukulbharti.in

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