भारत में आज भी कई घरों में बेटी का जन्म सिर्फ खुशी का नहीं, बल्कि भविष्य की चिंता भी लेकर आता है। शिक्षा, शादी, बेटी की देखभाल और घरेलू खर्चों को लेकर माता‑पिता के दिमाग में अक्सर यही सवाल घूमता है कि क्या उनकी बेटी को अच्छी पढ़ाई और सही जीवन मिल सकेगा। ऐसे में कई सरकारी योजनाएं उन परिवारों के लिए राहत भरी बन रही हैं, जो गरीबी रेखा के नीचे या सीमित संसाधनों के साथ बेटी की भविष्य‑निर्माण की कोशिश करते हैं।
इन्हीं में से एक ऐसी योजना की चर्चा हर जगह सुनाई दे रही है, जिसके तहत बेटी के जन्म से लेकर पढ़ाई के दौर तक कुल मिलाकर लगभग ₹2 लाख की आर्थिक सहायता मिलने का वादा किया जाता है।

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योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस तरह की योजनाओं का मुख्य उद्देश्य दो चीजों पर टिका है। पहला, बेटी के जन्म को समाज में और घरों में स्वीकार करवाना और दूसरा, उसे शिक्षा और स्वावलंबन तक पहुंचाने में मदद करना। इसके लिए सरकारें बेटी के नाम पर एक लंबी अवधि के लिए निवेश‑आधारित योजना बना रही हैं, जिसमें उसकी जन्म से लेकर 21 साल की उम्र तक धनराशि जमा होती है। इस प्रक्रिया का संदेश भी साफ है कि बेटी न सिर्फ़ घर की जिम्मेदारी, बल्कि देश का भविष्य भी है।
₹2 लाख कहां‑कहां से बनते हैं?
यह रकम अकेले एक चेक या एक बार की सहायता नहीं है, बल्कि एक लंबे समय में बँटी हुई आर्थिक मदद है। जन्म के समय बेटी के नाम पर एक निवेश या बांड खुलवाया जाता है, जिसमें सरकार की तरफ से कुछ हजार रुपये की बात आमतौर पर शुरू होती है। यह राशि साल‑दर‑साल ब्याज सहित बढ़ती रहती है और जब लड़की 21 साल की होती है, वह अनुमानित रूप से लगभग ₹2 लाख के आसपास पहुंच जाती है। इसके अलावा कई राज्यों में बेटी की पढ़ाई के दौरान अलग‑अलग चरणों पर छोटी‑छोटी राशियां भी दी जाती हैं, जो शिक्षा‑संबंधित खर्चों को हल्का करने में मदद करती हैं।
शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए क्या किया जा रहा है?
शिक्षा के मामले में इन योजनाओं का सबसे बड़ा काम यह है कि बेटियों को स्कूल से जोड़े रखा जाए। कई राज्यों में कक्षा 6, 8 और 10 में प्रवेश पर कुछ राशि दी जाती है, जिससे माता‑पिता उन्हें पढ़ाते रहने का फैसला आसानी से ले सकें। इन रुपयों का उपयोग फीस, यूनिफॉर्म, किताबें, बैग और अन्य आवश्यक सामान खरीदने में किया जा सकता है। इससे न सिर्फ़ ड्रॉपआउट कम होता है, बल्कि बेटी को भी समझ आता है कि उसकी पढ़ाई को समाज और सरकार दोनों तरफ से महत्व दिया जा रहा है।
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मां को भी मिलती है सहायता
कई राज्यों में यह योजना सिर्फ़ बेटी तक सीमित नहीं रहती। बेटी के जन्म पर माता को भी एक अतिरिक्त राशि दी जाती है, ताकि मातृत्व के समय के खर्चों को थोड़ा हल्का किया जा सके। यह राशि सिर्फ़ पैसे की नहीं, बल्कि एक सम्मान और समर्थन की भावना भी दिखाती है, जिससे घरों में बेटी के जन्म को एक वरदान के रूप में देखने की सोच बढ़ती है।
कौन ले सकता है लाभ?
लाभ पाने के लिए आमतौर पर कुछ मुख्य शर्तें होती हैं। परिवार की आय कुछ निर्धारित सीमा के अंदर होनी चाहिए, जिसे अक्सर BPL या गरीबी रेखा के नीचे वाले परिवारों के लिए रखा जाता है। बेटी का जन्म पंजीकृत होना और जन्म प्रमाण पत्र बना होना ज़रूरी माना जाता है। इसके अलावा आधार कार्ड, बैंक खाता और आवश्यकता होने पर जाति या आय प्रमाण भी मांगे जाते हैं। इन सभी दस्तावेज़ों के साथ आवेदन करने पर बेटी के नाम पर निवेश या बांड खोला जाता है और आगे की किस्तें तय चरणों पर जारी की जाती हैं।
आवेदन कैसे करें?
आवेदन की प्रक्रिया ज़्यादातर जगहों पर बहुत सरल है। आप अपने नज़दीकी ब्लॉक कार्यालय, नगरपालिका या राज्य सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग से फॉर्म ले सकते हैं। कई राज्यों में इन योजनाओं के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी बने हैं, जहां आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर से फॉर्म भरकर आवेदन कर सकते हैं। फॉर्म भरने के बाद दस्तावेज़ों की जांच होती है और मंजूरी मिलने पर बेटी के खाते में राशि जमा होनी शुरू हो जाती है।
राज्य से राज्य में अंतर
ध्यान रखने वाली सबसे ज़रूरी बात यह है कि यह योजना हर जगह एक जैसी नहीं है। एक राज्य में नाम और राशि एक तरह हो सकती है, तो दूसरे राज्य में अलग। इसलिए अगर आप उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली या किसी अन्य राज्य में रहते हैं, तो अपने राज्य की सरकारी वेबसाइट या ज़िला प्रशासन के ऑफिस से नवीनतम गाइडलाइन ज़रूर चेक करें। इससे आप यह जान सकते हैं कि आपके राज्य में इसी तरह की कौन‑सी योजनाएं चल रही हैं और उनकी राशि, शर्तें और आवेदन प्रक्रिया क्या है।
अपनी लाडली का भविष्य सुरक्षित करें
ऐसी योजनाएं तब तक असरदार होती हैं, जब तक परिवार उनसे जुड़ते हैं। अगर आपके घर में हाल ही में बेटी का जन्म हुआ है या आपकी कोई बेटी पढ़ाई की उम्र में है, तो इन योजनाओं के लिए आवेदन करना सिर्फ़ एक फॉर्म भरने की बात नहीं, बल्कि उसके भविष्य के लिए एक दृढ़ संकल्प है। इससे न सिर्फ़ आर्थिक बोझ हल्का होता है, बल्कि बेटी को भी यह संदेश मिलता है कि उसकी पढ़ाई और स्वावलंबन सबके लिए ज़रूरी है। इसलिए आज ही नज़दीकी ब्लॉक या आंगनवाड़ी केंद्र पर जाकर जानकारी ले सकते हैं।
















