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मैच्योरिटी से पहले तोड़ रहे हैं FD? बैंक के इस ‘हिडन’ चार्ज को जान लें, वरना ब्याज तो छोड़िए मूलधन से भी हाथ धोना पड़ेगा

इमरजेंसी में FD तोड़ने गए तो 1% पेनल्टी ने ब्याज गायब कर दिया। SBI-HDFC के नियम जानें, वरना नुकसान हो जाएगा। लोन लें या छोटी FD चुनें- बचाव के आसान तरीके सीखें। ये गलती 40% लोग करते हैं, आप न करें!

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फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD आज भी देश भर के लाखों परिवारों की पहली पसंद बनी हुई है। यह सुरक्षित निवेश का प्रतीक है, जहां मूलधन की गारंटी के साथ अच्छा ब्याज मिलता है। लेकिन इमरजेंसी के समय मैच्योरिटी से पहले FD तोड़ने की मजबूरी पड़ जाए तो हालात उलट सकते हैं। बैंक प्रीमैच्योर निकासी पर पेनल्टी लगाते हैं, जो ब्याज को खा जाती है। कई बार तो मूल राशि पर भी असर पड़ जाता है, जिससे निवेशक भारी नुकसान उठाते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि बिना पूरी जानकारी के यह कदम वित्तीय तबाही ला सकता है।

मैच्योरिटी से पहले तोड़ रहे हैं FD? बैंक के इस 'हिडन' चार्ज को जान लें, वरना ब्याज तो छोड़िए मूलधन से भी हाथ धोना पड़ेगा

पेनल्टी कैसे लगती है और कितना नुकसान होता है?

मान लीजिए आपने 5 लाख रुपये की FD 7 प्रतिशत सालाना ब्याज पर 3 साल के लिए जमा की। एक साल बाद अचानक जरूरत पड़ गई और आपने इसे तोड़ दिया। बैंक सामान्यत: निकासी के समय तक का ब्याज तो देते हैं, लेकिन पेनल्टी के रूप में 0.5 से 1 प्रतिशत तक ब्याज दर घटा देते हैं। इसका मतलब आपका 7 प्रतिशत ब्याज घटकर 6 से 6.5 प्रतिशत रह जाता है। सबसे बड़ा झटका तब लगता है जब शेष अवधि का ब्याज शून्य या बहुत कम कर दिया जाता है। कुल मिलाकर, अपेक्षित 25 हजार रुपये ब्याज के बदले मुश्किल से 15 हजार ही हाथ लगते हैं। बड़ी राशि वाली FD पर यह नुकसान और बढ़ जाता है।

बैंकों के अलग-अलग नियम और चार्ज

विभिन्न बैंकों में प्रीमैच्योर विड्रॉल के नियम थोड़े भिन्न होते हैं। सरकारी बैंक जैसे SBI में न्यूनतम 7 दिन की अवधि पूरी होने पर ही निकासी संभव है और पेनल्टी 0.5 से 1 प्रतिशत तक होती है। निजी बैंक HDFC 15 दिन बाद 1 प्रतिशत ब्याज काटते हैं। ICICI और PNB जैसे बैंक भी इसी दायरे में काम करते हैं। वहीं कुछ NBFC कंपनियां 0.5 प्रतिशत से शुरू करती हैं, लेकिन वे वैकल्पिक सुविधाएं भी देती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि पेनल्टी हमेशा ब्याज पर ही लागू होती है, मूलधन सुरक्षित रहता है। फिर भी, कम ब्याज के कारण कुल रिटर्न घट जाता है।

इमरजेंसी फंड के रूप में FD क्यों न लें

कई लोग FD को इमरजेंसी फंड समझते हैं, जो गलत साबित होता है। प्रीमैच्योर ब्रेक करने पर ब्याज की गणना सरल तरीके से की जाती है, न कि चक्रवृद्धि पर। इससे नुकसान दोगुना हो जाता है। एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि 40 प्रतिशत से अधिक निवेशक इस गलती के शिकार होते हैं। खासकर मध्यम वर्ग के लोग, जो सरकारी योजनाओं और बैंकिंग पर निर्भर रहते हैं, इस जाल में फंस जाते हैं।

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नुकसान से बचने के आसान उपाय

इस समस्या से बचना मुश्किल नहीं। सबसे अच्छा विकल्प FD पर ही लोन लेना है। इससे मूलधन बरकरार रहता है और केवल 1-2 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज देना पड़ता है। छोटी अवधि की FD जैसे 6 या 12 महीने वाली चुनें। कुछ स्कीमों में लोन सुविधा पहले से जुड़ी होती है। अप्रत्याशित स्थिति जैसे मृत्यु के मामले में पेनल्टी माफ भी हो सकती है। निकासी की प्रक्रिया सरल है बैंक शाखा या मोबाइल ऐप पर फॉर्म भरें, दस्तावेज सत्यापित कराएं और 1-2 दिनों में राशि आपके खाते में आ जाती है। लेकिन पहले बैंक से पूरी कैलकुलेशन जरूर करवा लें।

जागरूक निवेशक बनना जरुरी

उत्तराखंड जैसे क्षेत्रों में देहरादून के निवासी सरकारी सब्सिडी और सोलर योजनाओं से जुड़े निवेश करते हैं। यहां FD एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन जागरूकता के अभाव में यह फायदा नुकसान में बदल जाता है। निवेश से पहले नियम पढ़ें, विकल्प तलाशें। तीन बार सोचने के बाद ही कदम उठाएं। सुरक्षित निवेश को महंगा बनाने की भूल न करें। सही योजना से FD आपका साथ देगी।

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info@gurukulbharti.in

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