
ग्रामीण भारत की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालकों को अब पशुओं के इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार की क्रांतिकारी मोबाइल वेटरनरी सेवा ने पशुपालन को आसान बना दिया है। टोल-फ्री नंबर 1962 पर महज ₹2 से ₹10 के नाममात्र शुल्क में प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीम मोबाइल वैन सहित घर पहुंच रही है। यह सुविधा न केवल समय और धन बचाती है, बल्कि पशुओं की मृत्यु दर को भी कम कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है।
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मोबाइल वेटरनरी सेवा का शुभारंभ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2023 में इस योजना का शुभारंभ किया था, जब 201 करोड़ रुपये की लागत से 520 मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स (MVU) को हरी झंडी दिखाई गई। केंद्रीय पशुपालन मंत्री परशोत्तम रुपाला की मौजूदगी में शुरू हुई यह सेवा अब प्रदेश के 75 जिलों में पांच जोनल कंट्रोल सेंटर्स (लखनऊ, आगरा, गोरखपुर, मेरठ, वाराणसी) से संचालित हो रही है। हर वैन में पशु चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, दवाइयां, सर्जिकल उपकरण और ऑक्सीजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। पशु की समस्या बताते ही 30-60 मिनट में वैन पहुंच जाती है।
ग्रामीणों की परेशानी का अंत
पहले पशुपालकों को भैंस, गाय या भेड़ के बीमार होने पर सैकड़ों किलोमीटर लंबा सफर तय करना पड़ता था। ट्रैक्टर या बैलगाड़ी में पशु को ले जाना जोखिम भरा और महंगा साबित होता था। अब सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक 1962 पर कॉल करें, लोकेशन शेयर करें और समस्या बताएं-बाकी सब सरकारी टीम संभालेगी। इलाज के साथ दवाइयां मुफ्त मिलती हैं, कोई अतिरिक्त खर्च नहीं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह वरदान साबित हो रही है, जहां पशुपालन लाखों परिवारों की आजीविका है।
उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश की ‘पशु धन संजीवनी’, राजस्थान, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी यही 1962 नंबर काम कर रहा है। एमपी में 400+ एम्बुलेंस हैं, जबकि बिहार में पूरी तरह निःशुल्क। दिल्ली में स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं, लेकिन नजदीकी यूपी सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है।
योजना का लाभ कैसे लें
- कॉल करें: 1962 पर डायल करें (टोल-फ्री, सभी नेटवर्क पर)।
- विवरण दें: पशु का प्रकार (गाय, भैंस आदि), समस्या (बुखार, प्रसव, चोट) और सटीक लोकेशन बताएं।
- टीम पहुंचेगी: नजदीकी वैन 1 घंटे में आ जाएगी, इलाज और दवाएं प्रदान करेगी।
- शुल्क: ₹2-10 (कुछ जगह निःशुल्क), नकद या डिजिटल।
हाल के आंकड़ों से साबित है कि सेवा से दूध उत्पादन बढ़ा और पशु हानि घटी। हालांकि, व्यस्त लाइनों की शिकायतें आती हैं, जिसे विभाग सुधार रहा है।
व्यापक प्रभाव और भविष्य
यह योजना केंद्र सरकार की ‘पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना’ का हिस्सा है, जो 12 लाख निराश्रित गोवंशों की देखभाल सुनिश्चित करती है। पशुपालक अब तनावमुक्त हैं। रामप्रकाश (बाराबंकी के किसान) कहते हैं, “भैंस के ब्लोट में 1962 ने जान बचाई।” जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ेगी, यह पूरे देश में विस्तार पाएगी।
पशुपालकों से अपील: इमरजेंसी में तुरंत कॉल करें, लोकेशन GPS शेयर करें। अधिक जानकारी के लिए स्थानीय पशुपालन विभाग से संपर्क करें। यह सेवा न केवल पशु कल्याण, बल्कि किसान सशक्तिकरण की मिसाल है।
















