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Work From Home for Mothers: आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के लिए नई प्रोत्साहन राशि घोषित, मार्च से खाते में आएंगे इतने रुपये।

घर से काम करते हुए माताओं को सरकार का बड़ा तोहफा। नई प्रोत्साहन राशि घोषित, सीधे खाते में आएंगे पैसे। आवेदन कैसे करें, योग्यता क्या? अभी पढ़ें पूरी डिटेल और अप्लाई करें!

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ग्रामीण भारत की आधारशिला मानी जाने वाली आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ये बहनें, जो ज्यादातर माताएं हैं, अब घर से ही अपनी सेवाओं को जारी रखते हुए बेहतर आर्थिक सहायता पा सकेंगी। नई प्रोत्साहन राशि और वेतन वृद्धि से उनकी जिंदगी में स्थिरता आएगी।

Work From Home for Mothers: आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के लिए नई प्रोत्साहन राशि घोषित, मार्च से खाते में आएंगे इतने रुपये।

लंबे समय से सीमित आय के बोझ तले दबी ये कार्यकर्ता अब राहत की सांस लेंगी। देशभर में लाखों की संख्या में सक्रिय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, टीकाकरण और मातृ स्वास्थ्य की जिम्मेदारी निभाती हैं। आशा बहनें घर-घर जाकर स्वास्थ्य जागरूकता फैलाती हैं। इनकी मेहनत को सम्मान देते हुए सरकार ने मानदेय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की योजना बनाई है। यह बदलाव विशेष रूप से उन माताओं के लिए वरदान है, जो परिवार संभालते हुए काम करना चाहती हैं।

नई वेतन व्यवस्था क्या है?

पहले इन कार्यकर्ताओं को राज्यवार अलग-अलग राशि मिलती थी, जो चार से दस हजार रुपये के बीच होती थी। अब प्रस्तावित ढांचे में मूल वेतन पंद्रह हजार रुपये तक पहुंचेगा। इसमें महंगाई भत्ता, यात्रा भत्ता और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन जोड़े जाएंगे। कुल मिलाकर मासिक आय इक्यावन सौ रुपये अतिरिक्त हो सकती है। उत्कृष्ट कार्य पर दो हजार रुपये का मासिक बोनस भी सुनिश्चित किया गया है। यह राशि मार्च के अंत से बैंक खातों में पहुंचने लगेगी।

डिजिटल ऐप्स के इस्तेमाल पर पच्चीस सौ से पांच सौ रुपये का अलग प्रोत्साहन मिलेगा। इससे घर बैठे रिपोर्टिंग आसान हो जाएगी। सालाना स्तर पर पांच हजार दो सौ पचास रुपये का दिवाली बोनस भी मिलेगा। कुल बजट में पच्चीस हजार करोड़ रुपये का प्रावधान है, जिसमें से अधिकांश वेतन और प्रोत्साहन पर खर्च होगा।

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राज्य स्तर पर बदलावों की झलक

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री ने हाल ही में विधानसभा में घोषणा की कि आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाया जाएगा। पेंशन सुविधाओं को भी मजबूत करने का वादा किया गया। राजस्थान में बीस प्रतिशत वृद्धि के साथ कार्यकर्ताओं को छह हजार चार सौ अठावन रुपये मिलेंगे। सहायिकाओं के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन पर पांच हजार एक सौ रुपये का पुरस्कार होगा। केरल के बजट में आशा को हजार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को हजार और सहायिका को पांच सौ रुपये की बढ़ोतरी हुई।

ये राज्यवार प्रयास दिखाते हैं कि केंद्र की नीति को अपनाते हुए स्थानीय जरूरतों पर ध्यान दिया जा रहा है। अप्रैल से अधिकांश जगहों पर नया नियम लागू हो सकता है। कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों से पुष्टि करनी चाहिए।

महिलाओं के सशक्तिकरण पर असर

यह योजना घर से काम करने वाली माताओं को आत्मनिर्भर बनाएगी। पहले आर्थिक तंगी के कारण कई बहनें सेवा छोड़ देती थीं। अब बढ़ी आय से परिवार का बोझ कम होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण घटेगा, टीकाकरण मजबूत होगा और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे महिला सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी।

भविष्य में स्थायी नौकरी और बीमा जैसी सुविधाओं की मांग भी तेज हो सकती है। बजट सत्र में और बड़े फैसले अपेक्षित हैं। ये बहनें न केवल सेवा करेंगी, बल्कि अपने परिवार को भी मजबूत बनाएंगी। ग्रामीण भारत की प्रगति इसी पर टिकी है।

Work From Home for Mothers
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info@gurukulbharti.in

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