Join Youtube

क्या रिश्तेदारों को बताए बिना बेच सकते हैं ‘खानदानी जमीन’? बंटवारे की जमीन को लेकर क्या कहता है नया कानून, जान लें ये जरूरी नियम

पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) या खानदानी जमीन को बेचने की योजना बना रहे लोगों के लिए कानून को समझना बेहद जरूरी हो गया है अक्सर परिवारों में यह सवाल उठता है कि क्या कोई वारिस अपने हिस्से की जमीन बिना दूसरों की सहमति के बेच सकता है? कानूनी विशेषज्ञों और सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख के आधार पर इसके नियम अब काफी स्पष्ट हो चुके हैं

Published On:
क्या रिश्तेदारों को बताए बिना बेच सकते हैं 'खानदानी जमीन'? बंटवारे की जमीन को लेकर क्या कहता है नया कानून, जान लें ये जरूरी नियम
क्या रिश्तेदारों को बताए बिना बेच सकते हैं ‘खानदानी जमीन’? बंटवारे की जमीन को लेकर क्या कहता है नया कानून, जान लें ये जरूरी नियम

पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) या खानदानी जमीन को बेचने की योजना बना रहे लोगों के लिए कानून को समझना बेहद जरूरी हो गया है अक्सर परिवारों में यह सवाल उठता है कि क्या कोई वारिस अपने हिस्से की जमीन बिना दूसरों की सहमति के बेच सकता है? कानूनी विशेषज्ञों और सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख के आधार पर इसके नियम अब काफी स्पष्ट हो चुके हैं।

यह भी देखें: PM विद्या लक्ष्मी योजना: पढ़ाई के लिए सरकार दे रही है ₹10 लाख तक का लोन! जानें कौन से छात्र उठा सकते हैं फायदा और कैसे करें अप्लाई

क्या बिना बताए बिक सकती है जमीन?

इसका जवाब जमीन की स्थिति पर निर्भर करता है:

  1. अगर बंटवारा हो चुका है: यदि जमीन का कानूनी रूप से बंटवारा हो चुका है और आपके पास अपने हिस्से का रजिस्टर्ड पार्टिशन डीड (Registered Partition Deed) है, तो वह आपकी ‘स्व-अर्जित संपत्ति’ मानी जाएगी। न्यूज़ रिपोर्ट्स और कानूनी प्रावधानों के अनुसार, ऐसी स्थिति में आप अपना हिस्सा किसी को भी, कभी भी, बिना रिश्तेदारों को बताए बेच सकते हैं।
  2. अगर जमीन संयुक्त (अविभाजित) है: यदि कागजों पर जमीन अभी भी दादा या परदादा के नाम है और भाइयों या अन्य वारिसों के बीच बंटवारा नहीं हुआ है, तो आप पूरी जमीन या उसका कोई खास कोना अपनी मर्जी से नहीं बेच सकते। 

बंटवारे को लेकर नए नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख

हाल के कानूनी अपडेट्स (2025-26) के अनुसार, संपत्तियों को लेकर कुछ बड़े बदलाव सामने आए हैं:

  •  सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, एक वारिस अपने हिस्से का ‘अधिकार’ (Undivided Share) तो बेच सकता है, लेकिन खरीदार को जमीन के किसी भौतिक टुकड़े पर कब्जा तब तक नहीं मिलेगा जब तक कानूनी बंटवारा न हो जाए।
  •  हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत अब बेटियों की सहमति के बिना पैतृक संपत्ति का सौदा करना जोखिम भरा है। यदि कोई भाई बहनों को बताए बिना जमीन बेचता है, तो बहनें उसे कोर्ट में चुनौती देकर बिक्री को रद्द करवा सकती हैं।
  •  परिवार का मुखिया (Karta) केवल विशेष परिस्थितियों (जैसे परिवार पर भारी संकट या बच्चों की शिक्षा/इलाज) में ही बिना सहमति के जमीन बेच सकता है, जिसे ‘कानूनी आवश्यकता’ कहा जाता है। 

यह भी देखें: Holi Special Trains: यूपी-राजस्थान रूट पर स्पेशल ट्रेनें, त्योहार पर कन्फर्म सीट का मौका

रजिस्ट्रेशन और कानूनी मान्यता

सरकारी पोर्टल Department of Land Resources (DoLR) के अनुसार, किसी भी मौखिक बंटवारे की अब कोर्ट में अहमियत नहीं है, जमीन के लेन-देन के लिए सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में दस्तावेज पंजीकृत होना अनिवार्य है, बिना उचित प्रक्रिया के की गई बिक्री ‘शून्य’ (Null and Void) घोषित की जा सकती है। 

 अगर आप बिना बंटवारे के जमीन बेचते हैं, तो खरीदार पर भी खतरा मंडराता है क्योंकि उसे कब्जे के लिए सालों तक कोर्ट के चक्कर काटने पड़ सकते हैं। 

Ancestral Property
Author
info@gurukulbharti.in

Leave a Comment

संबंधित समाचार