भारती एयरटेल ने अपने चर्चित ग्लोबल इंटरनेशनल रोमिंग पैक की कीमत में अचानक 999 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। पहले मात्र 4999 रुपये में मिलने वाला यह सालाना पैक अब 5998 रुपये का हो गया है, जिससे विदेश यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लंबी अवधि की विदेश यात्रा करने वाले ग्राहक इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

यह पैक अप्रैल 2025 में लॉन्च हुआ था और तब से NRI, बिजनेसमैन व टूरिस्ट्स के बीच लोकप्रिय रहा। कंपनी ने कोई आधिकारिक घोषणा तो नहीं की, लेकिन उसके पोर्टल व ऐप पर नई दरें लागू हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 2026 का पहला बड़ा टैरिफ हाइक है, जो टेलीकॉम सेक्टर की बढ़ती लागत को दर्शाता है।
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नई सुविधाओं का पूरा ब्योरा
5998 रुपये वाले इस प्रीपेड पैक में 365 दिनों की वैलिडिटी मिलती है। विदेश यात्रा के दौरान ग्राहकों को 5 जीबी हाई-स्पीड डेटा, 100 मिनट की इनकमिंग व आउटगोइंग कॉल्स (भारत व लोकल नंबरों पर), तथा प्रतिदिन 100 एसएमएस की सुविधा प्रदान की जाती है। भारत लौटने पर रोजाना 1.5 जीबी हाई-स्पीड डेटा, अनलिमिटेड वॉइस कॉल्स व 100 एसएमएस का लाभ जारी रहता है। वैलिडिटी समाप्त होने पर वॉइस व एसएमएस सेवाएं ब्लॉक हो जाती हैं, लेकिन डेटा इस्तेमाल चलता रहता है। बेनिफिट्स में कोई बदलाव नहीं आया, सिर्फ कीमत बढ़ाई गई।
यात्रियों पर क्यों पड़ा भारी बोझ?
विदेश जाने वाले लाखों ग्राहक इस पैक पर निर्भर थे क्योंकि यह साल भर रोमिंग कवरेज देता था। अब 20 प्रतिशत महंगा होने से बजट ट्रैवलर्स पर दबाव बढ़ा है। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने लिखा, बेनिफिट्स वही हैं, सिर्फ लूट बढ़ गई। रिलायंस जियो व वोडाफोन आइडिया के हालिया हाइक्स के बाद एयरटेल का यह कदम अपेक्षित तो था, लेकिन इतनी जल्दी किसी ने उम्मीद नहीं की। NRIs व फ्रीक्वेंट ट्रैवलर्स को अब छोटे पैक्स या लोकल ई-सिम पर स्विच करना पड़ सकता है।
कंपनी के पीछे छिपे कारण
टेलीकॉम कंपनियां 5जी नेटवर्क विस्तार, एआई आधारित सेवाओं व इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के नाम पर लगातार कीमतें बढ़ा रही हैं। TRAI के दिशानिर्देशों के बावजूद ARPU (औसत राजस्व प्रति यूजर) बढ़ाने का दबाव है। पिछले साल जियो व एयरटेल ने कई राउंड हाइक किए, जिससे ग्राहकों की जेब ढीली हुई।
ग्राहक क्या करें बचाव के लिए?
पुराने रेट पर रीचार्ज जल्द कर लें क्योंकि स्टॉक सीमित हो सकता है। एयरटेल ऐप या वेबसाइट से वैलिडिटी चेक करें। जियो या वीआई के समान पैक्स की तुलना करें। गंतव्य देश में स्थानीय सिम या ई-सिम सस्ता विकल्प साबित हो सकता है।
यह बढ़ोतरी पूरे सेक्टर की प्रवृत्ति को उजागर करती है जहां ग्राहक बेहतर कनेक्टिविटी के नाम पर ज्यादा भुगतान करने को बाध्य हैं। आने वाले महीनों में और हाइक्स की आशंका है।
















