
वैश्विक ऊर्जा बाजार में मचे हाहाकार के बीच जो बाइडन (या तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन) ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान के साथ छिड़े युद्ध जैसी स्थितियों के कारण आसमान छूती तेल की कीमतों को काबू में करने के लिए अमेरिका ने अपनी पुरानी नीतियों को ताक पर रख दिया है।
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30 दिनों की ‘स्पेशल विंडो’
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक नया लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत उन रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद और डिलीवरी को मंजूरी दे दी गई है जो 12 मार्च 2026 से पहले जहाजों पर लोड हो चुके थे। यह छूट 11 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी, हैरान करने वाली बात यह है कि यह फैसला उन सख्त प्रतिबंधों के ठीक बाद आया है, जिन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए लगाया गया था।
भारत से शुरू हुआ ‘खेल’, अब दुनिया की बारी
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब मार्च के पहले हफ्ते में अमेरिका ने केवल भारतीय रिफाइनरियों को समुद्र में फंसे (stranded) रुसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट दी थी। अब इस राहत का दायरा बढ़ाते हुए अमेरिका ने इसे वैश्विक स्तर पर लागू कर दिया है विशेषज्ञों का मानना है कि यह अमेरिका का एक बड़ा ‘U-Turn’ है, क्योंकि कुछ ही महीने पहले उसने भारत पर रुसी तेल खरीदने के कारण भारी दंडात्मक टैरिफ (Penal Tariff) लगाए थे।
आखिर अमेरिका क्यों झुका?
इस अचानक आए बदलाव के पीछे तीन मुख्य कारण माने जा रहे हैं:
- ईरान-इजरायल युद्ध: पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है।
- $100 के पार तेल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई का खतरा मंडरा रहा है।
- भारत की रणनीतिक जीत: भारतीय रिफाइनरियों ने पहले ही रूसी तेल को प्रोसेस करने की अपनी क्षमता और जरु रत को स्पष्ट कर दिया था। अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भारतीयों को “बहुत अच्छे कलाकार” (Good Actors) बताते हुए कहा कि यह कदम केवल बाजार को स्थिर करने के लिए है और इससे रूस को कोई नया वित्तीय लाभ नहीं होगा।
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भारत पर क्या होगा असर?
भारत के लिए यह राहत की खबर है क्योंकि समुद्र में अटके हुए रुसी तेल के कार्गो अब भारतीय बंदरगाहों पर अनलोड हो सकेंगे, इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यह छूट केवल उन शिपमेंट्स के लिए है जो पहले से ही समुद्र में हैं (Loaded before March 12), जिसका अर्थ है कि भविष्य के नए सौदों पर प्रतिबंध अब भी बरकरार रह सकते हैं।
















