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खुदाई में निकला ‘कुबेर का खजाना’! परिवार मांग रहा अपना हिस्सा, 500 साल पुरानी स्वर्ण मुद्राओं पर किसका हक?

जमीन के भीतर छिपे खजाने की कहानियां अक्सर फिल्मों में सुनी जाती हैं, लेकिन जब हकीकत में मिट्टी से सोने के सिक्के निकलने लगें, तो हड़कंप मचना लाजिमी है, हाल ही में खुदाई के दौरान मिलीं 500 साल पुरानी स्वर्ण मुद्राओं ने एक नया कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है, जहाँ एक ओर परिवार इस 'कुबेर के खजाने' पर अपना पुश्तैनी हक जता रहा है, वहीं प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जमीन से निकली हर ऐतिहासिक वस्तु पर पहला अधिकार देश का होता है

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खुदाई में निकला 'कुबेर का खजाना'! परिवार मांग रहा अपना हिस्सा, 500 साल पुरानी स्वर्ण मुद्राओं पर किसका हक?
खुदाई में निकला ‘कुबेर का खजाना’! परिवार मांग रहा अपना हिस्सा, 500 साल पुरानी स्वर्ण मुद्राओं पर किसका हक?

जमीन के भीतर छिपे खजाने की कहानियां अक्सर फिल्मों में सुनी जाती हैं, लेकिन जब हकीकत में मिट्टी से सोने के सिक्के निकलने लगें, तो हड़कंप मचना लाजिमी है, हाल ही में खुदाई के दौरान मिलीं 500 साल पुरानी स्वर्ण मुद्राओं ने एक नया कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है, जहाँ एक ओर परिवार इस ‘कुबेर के खजाने’ पर अपना पुश्तैनी हक जता रहा है, वहीं प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जमीन से निकली हर ऐतिहासिक वस्तु पर पहला अधिकार देश का होता है।

यह भी देखें: UP के सरकारी कर्मचारियों के लिए बदल गए नियम! अब हर साल देना होगा संपत्ति का ब्योरा; योगी सरकार ने दी सख्त आदेश को मंजूरी

क्या है पूरा मामला?

मामला उस समय गरमाया जब एक पुराने घर की नींव खोदते समय मजदूरों को मिट्टी के घड़े में सोने के सिक्के मिले। दावा किया जा रहा है कि ये सिक्के सदियों पुराने हैं। जैसे ही खबर फैली, जमीन के मालिक और उनके परिवार ने इसे अपने पूर्वजों की संपत्ति बताते हुए दावेदारी ठोक दी। फिलहाल, स्थानीय पुलिस और पुरातत्व विभाग ने खजाने को अपनी सुरक्षा में ले लिया है। 

कानून की नजर में किसका है खजाना?

भारत में जमीन के नीचे दबे खजाने को लेकर नियम बेहद सख्त हैं। भारतीय निधि अधिनियम, 1878 (Indian Treasure Trove Act) के तहत इसके मालिकाना हक का फैसला होता है: 

  • कलेक्टर को सूचना देना अनिवार्य: यदि किसी व्यक्ति को ₹10 से अधिक मूल्य का कोई भी खजाना मिलता है, तो उसे तुरंत जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर को सूचित करना होता है। ऐसा न करना कानूनी अपराध है।
  • सरकारी संपत्ति या निजी? यदि खजाना 100 साल से अधिक पुराना है, तो वह ‘पुरावशेष’ (Antique) माना जाता है, ऐसे मामलों में सरकार उस पर अपना पूर्ण अधिकार जता सकती है ताकि उसे संग्रहालय में संरक्षित किया जा सके।
  • बंटवारे का गणित: यदि खोजकर्ता और जमीन का मालिक अलग-अलग हैं, तो आमतौर पर खजाने का 75% हिस्सा खोजने वाले को और 25% हिस्सा मालिक को दिया जाता है। लेकिन यदि सरकार इसे राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करती है, तो संबंधित पक्षों को बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा दिया जाता है। 

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परिवार के दावे की क्या है हकीकत?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, परिवार का दावा तभी टिक सकता है जब वे ठोस सबूतों के साथ यह साबित कर सकें कि वह खजाना उनके ही पूर्वजों ने वहां गाड़ा था, 500 साल पुराने सिक्कों के मामले में यह साबित करना लगभग नामुमकिन होता है, क्योंकि इतनी पुरानी वस्तुएं Antiquities and Art Valuables Act (1972) के दायरे में आ जाती हैं।

प्रशासन की अपील

पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे खजाने देश की सांस्कृतिक विरासत हैं, इसे छिपाने या अवैध रुप से बेचने की कोशिश करने पर कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान है, फिलहाल, इन स्वर्ण मुद्राओं की ऐतिहासिक जांच की जा रही है ताकि उनके कालखंड और राजवंश का सही पता लगाया जा सके।

500 Year Old Gold Treasure Found in Lakkundi Karnataka Gold Treasure
Author
info@gurukulbharti.in

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