
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को और सख्त करते हुए सरकारी कर्मचारियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, 10 मार्च 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956’ में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी गई, अब प्रदेश के लाखों सरकारी सेवकों को न केवल अपनी अचल संपत्ति, बल्कि शेयर बाजार में निवेश और महंगी चल संपत्ति की जानकारी भी सरकार को देनी होगी।
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नए नियमों की मुख्य बातें
कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए संशोधनों के बाद कर्मचारियों के लिए निम्नलिखित बदलाव अनिवार्य हो गए हैं:
सालाना अचल संपत्ति का विवरण
- अब सभी सरकारी कर्मचारियों को हर साल अपनी अचल संपत्ति (जैसे जमीन, मकान, फ्लैट) की घोषणा करनी होगी।
- इससे पहले यह विवरण हर पांच साल में एक बार देना होता था।
शेयर बाजार और निवेश पर नजर
- यदि कोई कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने 6 महीने के मूल वेतन (Basic Pay) से अधिक की राशि स्टॉक, शेयर या अन्य निवेश में लगाता है, तो उसे सक्षम प्राधिकारी को इसकी सूचना देनी होगी।
- पुरानी व्यवस्था में यह सीमा एक महीने के मूल वेतन के बराबर थी।
चल संपत्ति की खरीद-फरोख्त
- दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति (जैसे वाहन या अन्य कीमती सामान) खरीदने या बेचने पर विभाग को जानकारी देना अनिवार्य है।
- इससे पहले यह नियम एक महीने के वेतन से अधिक की ट्रांजैक्शन पर लागू होता था।
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लापरवाही पर रुकेगा वेतन और प्रमोशन
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इन नियमों का पालन न करने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी संपत्ति का ब्योरा Manav Sampada Portal पर ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य है।
- वेतन पर रोक: जो कर्मचारी समय सीमा के भीतर अपनी संपत्ति का विवरण दर्ज नहीं करेंगे, उनका वेतन रोका जा सकता है।
- प्रमोशन पर ब्रेक: नियमों का उल्लंघन करने वाले या विवरण न देने वाले कार्मिकों को पदोन्नति (Promotion) और एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (ACP) के लाभ से वंचित किया जा सकता है।
इस कदम का उद्देश्य सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ाना और आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर अंकुश लगाना है।
















