देशभर के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के दिनों को बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। कई राज्यों ने गर्मी की लंबी छुट्टियों को कम करने का ऐलान किया है। अब छात्रों को कम अवकाश मिलेगा और स्कूल ज्यादा दिन खुले रहेंगे। इसका मकसद सिलेबस समय पर पूरा करना और शिक्षा की गुणवत्ता मजबूत करना है। अभिभावक और शिक्षक इस बदलाव को लेकर चिंतित हैं, खासकर तेज गर्मी के मौसम में।

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राजस्थान में सबसे ज्यादा बदलाव
राजस्थान सरकार ने शिक्षा सत्र को तीन महीने पहले शिफ्ट कर दिया है। नया सत्र 1 अप्रैल से शुरू होगा, जबकि पहले यह जुलाई में होता था। गर्मी की छुट्टियां अब सिर्फ 35 दिन की रहेंगी। स्कूल 16 मई से बंद होंगे और 20 जून को फिर खुल जाएंगे। पहले ये छुट्टियां 45 दिनों तक चलती थीं। 21 जून को योग दिवस के लिए विशेष आयोजन होगा। जयपुर और उदयपुर जैसे शहरों में अभिभावक जागरूकता अभियान चला रहे हैं। उनका कहना है कि 40 डिग्री से ज्यादा तापमान में बिना कूलिंग के कक्षाएं बच्चों के लिए मुश्किल साबित होंगी। शिक्षा विभाग का तर्क है कि इससे सालाना 220 पढ़ाई के दिन सुनिश्चित होंगे।
उत्तराखंड का नया शेड्यूल
उत्तराखंड में गर्मी और सर्दी दोनों छुट्टियों को बराबर किया गया है। हर छुट्टी अब 16 दिन की होगी। गर्मी में स्कूल 15 जून से 30 जून तक बंद रहेंगे। सर्दियों में 1 जनवरी से 16 जनवरी तक अवकाश रहेगा। कुल मिलाकर छुट्टियां 32 दिन रहेंगी, जबकि पहले 48 दिन हुआ करती थीं। देहरादुन और हरिद्वार जैसे मैदानी इलाकों में यह लागू होगा। पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी को देखते हुए कुछ छूट मिल सकती है। स्थानीय प्रशासन ने जिलों से सुझाव मांगे हैं। इससे 200 कार्यदिवस मिलेंगे, जो सिलेबस पूरा करने में मददगार साबित होंगे।
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दूसरे राज्यों की जानकारी
उत्तर प्रदेश में गर्मी की छुट्टियां 21 मई से 30 जून तक तय हैं। कुल 112 दिन अवकाश रहेंगे, जिसमें रविवार भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ में मौसम के आधार पर छुट्टियां बढ़ाई जा सकती हैं। दिल्ली और हरियाणा में भी इसी तरह के बदलाव की चर्चा है। कोविड के बाद ऑनलाइन क्लासेस के अनुभव से सरकारें पढ़ाई के घंटे बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह लंबे समय में छात्रों के भविष्य के लिए अच्छा है।
अभिभावकों की चिंता और भविष्य
अभिभावक संगठनों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में सुविधाओं का अभाव है। गर्मी में स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकता है। कुछ जगहों पर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की योजना है। माता-पिता को सलाह दी जाती है कि स्थानीय शिक्षा विभाग से अपडेट लें। यह बदलाव 10 साल बाद आया है और छात्रों की दिनचर्या बदल देगा। ज्यादा पढ़ाई से प्रतियोगी परीक्षाओं में मदद मिलेगी, लेकिन संतुलन जरूरी है।
















