
चंद्रमा और मंगल पर तिरंगा फहराने के बाद, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब सौर मंडल के सबसे गर्म ग्रह ‘शुक्र’ (Venus) की गुत्थियों को सुलझाने के लिए तैयार है, भारत सरकार ने इसरो के इस महत्वाकांक्षी शुक्रयान-1 मिशन, जिसे आधिकारिक तौर पर वीनस ऑर्बिटर मिशन (VOM) कहा जा रहा है, को हरी झंडी दे दी है।
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लॉन्च की नई तारीख और बजट
- लॉन्च तिथि: हालांकि पहले इसके 2026 में लॉन्च होने की चर्चा थी, लेकिन इसरो के नवीनतम कार्यक्रम के अनुसार अब इसे 29 मार्च 2028 को लॉन्च किया जाएगा। यह समय इसलिए चुना गया है क्योंकि तब पृथ्वी और शुक्र के बीच की दूरी सबसे कम होगी।
- कुल बजट: केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक मिशन के लिए ₹1,236 करोड़ के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी है। इसमें से लगभग ₹824 करोड़ केवल अंतरिक्ष यान के निर्माण पर खर्च किए जाएंगे।
मिशन के मुख्य उद्देश्य
शुक्रयान-1 का लक्ष्य शुक्र ग्रह के उन रहस्यों से पर्दा उठाना है जो अब तक दुनिया के लिए अनसुलझे हैं:
- सतह का अध्ययन: ग्रह की सतह और उसके नीचे (Sub-surface) की परतों की जांच करना।
- वायुमंडल का विश्लेषण: शुक्र के घने और जहरीले सल्फ्यूरिक एसिड वाले बादलों और वहां की वायुमंडलीय गतिविधियों का गहराई से अध्ययन करना।
- सौर हवाओं का प्रभाव: सूर्य से आने वाली किरणों और सौर हवाओं का शुक्र के आयनमंडल पर क्या असर होता है, इसका डेटा जुटाना।
तकनीकी ताकत और पेलोड
- शक्तिशाली रॉकेट: इस भारी-भरकम मिशन को इसरो के सबसे भरोसेमंद और शक्तिशाली रॉकेट LVM-3 के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
- वैज्ञानिक उपकरण: यान अपने साथ लगभग 100 किलोग्राम वजन के 19 अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरण (पेलोड्स) ले जाएगा, जिसमें हाई-रिजोल्यूशन रडार और इंफ्रारेड कैमरे शामिल होंगे।
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क्यों खास है यह मिशन?
शुक्र को ‘पृथ्वी की जुड़वां बहन’ कहा जाता है, लेकिन वहां का वातावरण पृथ्वी से बिल्कुल उलट और बेहद गर्म है, वैज्ञानिकों का मानना है कि शुक्र का अध्ययन करने से हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि कोई रहने योग्य ग्रह कैसे धीरे-धीरे एक ‘आग के गोले’ में तब्दील हो जाता है, जो भविष्य में पृथ्वी की जलवायु को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।
















