
प्रॉपर्टी और किरायेदारी को लेकर सालों से चले आ रहे भ्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्थिति साफ कर दी है, अक्सर यह चर्चा होती है कि अगर कोई किरायेदार किसी प्रॉपर्टी पर 12 साल या उससे अधिक समय तक रह लेता है, तो वह उसके मालिकाना हक का दावा कर सकता है, लेकिन कोर्ट ने इस ‘मिथक’ को सिरे से खारिज करते हुए मकान मालिकों को बड़ी राहत दी है।
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किरायेदार कभी नहीं बन सकता मालिक: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने ज्योति शर्मा बनाम विष्णु गोयल (2025) मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि किरायेदारी का आधार ‘अनुमति’ (Permissive Possession) होता है। कोर्ट ने कहा कि चाहे किरायेदार 5 साल रहे या 50 साल, वह केवल रहने के अधिकार का हकदार है, प्रॉपर्टी के मालिकाना हक का नहीं।
अदालत ने जोर देकर कहा कि किरायेदार और मकान मालिक का रिश्ता एक अनुबंध पर टिका होता है, जब तक यह रिश्ता कायम है, किरायेदार का कब्जा ‘प्रतिकूल’ (Adverse) नहीं माना जा सकता।
क्या है 12 साल का ‘एडवर्स पजेशन’ नियम?
कानून में ‘प्रतिकूल कब्जे’ (Adverse Possession) का प्रावधान है, जिसके तहत यदि कोई व्यक्ति किसी निजी संपत्ति पर लगातार 12 वर्षों तक मालिक की जानकारी में, लेकिन उसकी मर्जी के बिना (Hostile Possession) कब्जा रखता है, तो वह मालिकाना हक मांग सकता है।
किरायेदारों के लिए यह नियम क्यों नहीं?
- चूंकि किरायेदार मकान मालिक की सहमति से रहता है और किराया देता है, इसलिए उसका कब्जा कभी भी ‘शत्रुतापूर्ण’ या ‘अवैध’ नहीं माना जाता।
- कोर्ट के अनुसार, किरायेदारी की शुरुआत ही मालिक की अनुमति से होती है, इसलिए समय बीतने के साथ यह अपने आप मालिकाना हक में नहीं बदल सकती।
मकान मालिकों के लिए ‘अलर्ट’
हालांकि फैसला मकान मालिकों के पक्ष में है, लेकिन कानूनी जानकारों का मानना है कि सावधानी जरुरी है, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किरायेदारी खत्म होने के बाद भी किरायेदार कब्जा नहीं छोड़ता और मकान मालिक 12 साल तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करता, तो स्थिति जटिल हो सकती है।
निष्कर्ष: कागजी कार्रवाई है जरुरी
इस फैसले का ‘कड़वा सच’ यही है कि कानून केवल उन्हें सुरक्षा देता है जो सजग हैं, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि रेंट एग्रीमेंट की अवधि चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, किरायेदार को मालिक बनने का कोई जन्मसिद्ध अधिकार नहीं मिलता।
मकान मालिकों को सलाह दी गई है कि वे हमेशा रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट बनवाएं और किराये की रसीद का रिकॉर्ड रखें ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी विवाद से बचा जा सके।
















