मध्य पूर्व का राजनीतिक नक्शा बदलने की कगार पर है। ईरान के खिलाफ बढ़ते दबाव और कुर्द लड़ाकों की चेतावनी ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की छाया में ढकेल दिया है। अमेरिका और इजरायल की ओर से सैन्य तैयारी के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के टुकड़े हो जाएंगे या यहां नया देश उभरेगा।

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अमेरिकी रणनीति का नया अध्याय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। खुफिया जानकारी के आधार पर परमाणु केंद्रों, मिसाइल अड्डों और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के ठिकानों पर निशाना साधने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य ईरान के सर्वोच्च नेता को सत्ता से हटाना है। मध्य पूर्व में फाइटर जेट्स की तैनाती और नौसैनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। यदि ईरान ने अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर रोक न लगाई, तो साल के अंत तक बड़े पैमाने पर कार्रवाई हो सकती है। यह कदम न केवल ईरान को कमजोर करेगा, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन को भी हिला देगा।
कुर्द विद्रोह का उफान
ईरान-इराक सीमा पर कुर्द समूह सक्रिय हो चुके हैं। लंबे समय से स्वायत्तता की मांग कर रहे ये लड़ाके अब निर्णायक जंग की तैयारी में हैं। बाहरी समर्थन से मजबूत हुए कुर्द बल ईरान के पश्चिमोत्तर इलाकों में घुसपैठ की योजना बना रहे हैं। पहले ईरान ने इन पर हवाई कार्रवाई की थी, लेकिन अब कुर्द कमांडरों ने अंतिम युद्ध की घोषणा कर दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सफलता मिली तो ईरान का एक बड़ा हिस्सा स्वतंत्र हो सकता है। कुर्दों को नया ठिकाना देने का वादा इस संघर्ष को और भड़का रहा है।
क्षेत्रीय ताकतों का गठजोड़
सुन्नी देश खामोश समर्थन दे रहे हैं, लेकिन अपनी जमीन उपलब्ध नहीं करा रहे। दूसरी ओर रूस और चीन ईरान के साथ नौसैनिक अभ्यास में जुटे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी गतिविधि से वैश्विक व्यापार पर असर पड़ने लगा है। ईरान ने पड़ोसी देशों को धमकी दी है कि जरूरत पड़ी तो जवाबी कार्रवाई होगी। यह उलझन पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर करने का खतरा पैदा कर रही है। तेल आपूर्ति में रुकावट से वैश्विक अर्थव्यवस्था डगमगा सकती है।
वैश्विक चिंता और भारत पर असर
तेल कीमतों में उछाल से भारत जैसे आयातक देशों को महंगाई का सामना करना पड़ेगा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने वहां रहने वाले नागरिकों को सतर्क रहने को कहा है। इतिहास बताता है कि ऐसे संकटों में कुर्दों को अक्सर धोखा मिला है, फिर भी उनका संघर्ष जारी है। क्या यह नया देश बनेगा या व्यापक जंग छिड़ेगी, यह समय ही बताएगा। दुनिया सांस थामे इस घटनाक्रम को देख रही है। फिलहाल शांति की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही।
















