
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में किरायेदारी विवादों पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो उत्तर प्रदेश के लाखों मकान मालिकों और किरायेदारों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा, कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई किरायेदार किसी भी कारणवश परिसर को खाली कर देता है, तो उस संपत्ति पर उसके सभी पूर्व अधिकार और कानूनी सुरक्षाएं खुद ही ही समाप्त हो जाती हैं।
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फैसले की मुख्य बातें: मकान मालिकों को मिली बड़ी राहत
अदालत ने अपने निर्णय में कई ऐसे बिंदुओं को स्पष्ट किया है जो मकान मालिकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं:
- जस्टिस नीरज तिवारी और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि एक बार किरायेदार ने परिसर खाली कर दिया या संरचना (structure) ध्वस्त हो गई, तो उसे पहले दी गई किसी भी अंतरिम सुरक्षा (interim protection) का कोई कानूनी महत्व नहीं रह जाता।
- कोर्ट ने दोहराया कि किरायेदार आम तौर पर ‘मकान मालिक की मर्जी’ (pleasure of landlord) पर निर्भर होता है, यदि मकान मालिक को अपने व्यक्तिगत या व्यावसायिक उपयोग के लिए जगह की वास्तविक आवश्यकता है, तो किरायेदार को कब्जा छोड़ना ही होगा।
- मकान मालिक को यह चुनने की पूरी आजादी है कि उसकी कौन सी संपत्ति उसके व्यवसाय या रहने के लिए सबसे उपयुक्त है, किरायेदार मकान मालिक को यह सुझाव नहीं दे सकता कि वह अपनी किसी अन्य संपत्ति का उपयोग करे।
बिना रेंट एग्रीमेंट के भी हो सकेगी बेदखली
उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के तहत कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मकान मालिक और किरायेदार के बीच कोई लिखित अनुबंध (Written Agreement) नहीं है, तब भी रेंट अथॉरिटी के पास बेदखली (eviction) की अर्जी स्वीकार करने का अधिकार है, अब लिखित समझौते की कमी मकान मालिक के कानूनी अधिकारों के आड़े नहीं आएगी।
सार्वजनिक सुरक्षा को दी प्राथमिकता
कोर्ट ने एक अन्य मामले में यह भी कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा किरायेदारी के अधिकारों से ऊपर है, यदि नगर निकाय किसी इमारत को जर्जर या खतरनाक घोषित करते हैं, तो किरायेदार उसे खाली करने से इनकार नहीं कर सकता और न ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में बाधा डाल सकता है, यह फैसला उन मकान मालिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो लंबे समय से अपनी संपत्तियों को खाली कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे, वहीं किरायेदारों के लिए यह एक कड़ा संदेश है कि वे अब अपनी शर्तों पर मकान मालिक की संपत्ति पर कब्जा बरकरार नहीं रख सकेंगे।
















