
देश में रोजाना करोड़ों वाहन सड़कों पर दौड़ते हैं। तेज रफ्तार जिंदगी के इस दौर में लोग जल्दी पहुंचने की होड़ में अक्सर ट्रैफिक नियम भूल जाते हैं। लेकिन यही छोटी लापरवाहियां बड़े हादसों की वजह बन जाती हैं। हर साल सड़क दुर्घटनाओं में हजारों परिवार अपनों को खो देते हैं। तेज रफ्तार से ड्राइविंग, रेड लाइट जंप करना, मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना या नशे में गाड़ी चलाना – यह सब अब सिर्फ गलतियां नहीं बल्कि खतरे की घंटी बन चुके हैं।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में थर्ड नेशनल कॉन्क्लेव ऑन रोड सेफ्टी में बड़ा ऐलान किया। इसी को देखते हुए सरकार सड़क सुरक्षा के नियमों को और सख्त बनाने की तैयारी में है। आने वाले समय में ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर ‘ग्रेडेड अंक प्रणाली’ या ‘थ्री-स्ट्राइक’ सिस्टम लागू किया जा सकता है। जिससे बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और उनका लाइसेंस तक रद्द किया जा सकता है। यह व्यवस्था ड्राइविंग में डिसिप्लिन बढ़ाने के लिए बड़ा कदम मानी जा रही है।
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ग्रेडेड अंक प्रणाली क्या है?
सरकार जिस नई व्यवस्था पर काम कर रही है, उसे ग्रेडेड अंक प्रणाली कहा जा रहा है। इस सिस्टम में हर ड्राइवर के लाइसेंस पर तय अंक दिए जाएंगे – जैसे 12 या 10 पॉइंट्स। जब भी कोई चालक ट्रैफिक नियम तोड़ेगा, उसके अंक कम कर दिए जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति तेज रफ्तार से गाड़ी चलाता है, सिग्नल तोड़ता है, रॉन्ग डायरेक्शन में वाहन चलाता है या शराब पीकर ड्राइविंग करता है, तो उसके अंक तेजी से कट सकते हैं। गंभीर उल्लंघनों जैसे नशे में ड्राइविंग या ओवरस्पीडिंग पर ज्यादा पॉइंट्स (4-6) कटेंगे, जबकि हेलमेट न पहनना या सीटबेल्ट न लगाना जैसे मामूली उल्लंघनों पर कम (1-2)।
सड़क परिवहन मंत्रालय का मानना है कि यह सिस्टम लोगों को जिम्मेदारी से वाहन चलाने के लिए मोटिवेट करेगा। अगर किसी ड्राइवर के सारे अंक खत्म हो जाते हैं, तो उसका लाइसेंस छह महीने तक के लिए सस्पेंड किया जा सकता है। बार-बार नियम तोड़ने पर लाइसेंस पूरी तरह कैंसिल करने का प्रावधान भी होगा। नोएडा और दिल्ली जैसे क्षेत्रों में पहले से तीन चालानों पर लाइसेंस रद्द करने का स्थानीय प्रयोग सफल रहा है, जो अब राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार पा सकता है।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
भारत में सड़क सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हर साल करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें 1.8 लाख से ज्यादा मौतें दर्ज की जाती हैं। हादसों की प्रमुख वजहें ओवरस्पीडिंग (70%), हेलमेट-सीटबेल्ट न पहनना और मोबाइल यूज हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ जुर्माना बढ़ाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकती। नितिन गडकरी ने कहा कि लोगों में कानून का डर ही नहीं है, इसलिए यह सिस्टम व्यवहार बदलने पर फोकस करेगा।
इसके अलावा सरकार 100 हाई-रिस्क जिलों में ब्लैक स्पॉट्स ठीक कर रही है। हिमालयी इलाकों में 350 भूस्खलन स्पॉट्स पर काम तेज है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर 400 हाई-टेक एंबुलेंस तैनात होंगी, जो गोल्डन ऑवर में मरीज पहुंचाएंगी। जो राज्य-जिले ज्यादा हादसे दर्ज करेंगे, उनका नाम सार्वजनिक शर्मसार किया जाएगा। यह ‘थ्री-स्ट्राइक’ पॉलिसी अमेरिका जैसे देशों से प्रेरित है, जहां बार-बार अपराध पर सजा सख्त होती है।
प्रभाव और जागरूकता
नया सिस्टम लागू होते ही ड्राइवरों को ई-चालान ऐप या परिवहन पोर्टल पर अपने पॉइंट्स चेक करने होंगे। पहले सस्पेंशन के बाद ट्रेनिंग या फाइन देकर बहाली संभव, लेकिन तीसरी स्ट्राइक पर स्थायी रद्दी। सुप्रीम कोर्ट के सड़क सुरक्षा निर्देशों से भी यह जुड़ा है। ड्राइवर संगठनों का कहना है कि इससे दुर्घटनाएं 20-30% कम हो सकती हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान जरूरी।
कुल मिलाकर, यह कदम सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में क्रांतिकारी है। ड्राइवरों को अब सतर्क रहना होगा- एक गलती माफ, दूसरी चेतावनी, तीसरी पर लाइसेंस अलविदा! सरकार की यह पहल लाखों जिंदगियां बचा सकती है।
















