
सैलरी पाने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) क्लेम करने के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने ड्राफ्ट इनकम-टैक्स रूल्स 2026 के तहत प्रस्ताव दिया है कि अब HRA डिक्लेरेशन फॉर्म में किरायेदार को मकान मालिक के साथ अपने रिश्ते की जानकारी भी देनी होगी। यह बदलाव अप्रैल 2026 से लागू होने की तैयारी में है, जिससे किराए के मकान में रहने वालों की टैक्स देनदारी बढ़ सकती है।
पहले कर्मचारी सिर्फ रेंट रसीद, रेंट एग्रीमेंट और सालाना किराया 1 लाख रुपये से ज्यादा होने पर मकान मालिक का PAN जमा करते थे। लेकिन नए नियमों में ‘रिलेशनशिप डिस्क्लोजर’ जोड़ दिया गया है। अगर मकान मालिक माता-पिता, पति-पत्नी या रिश्तेदार है, तो यह स्पष्ट बताना जरूरी होगा। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह फर्जी क्लेम रोकने का सरकारी प्रयास है, खासकर परिवार के सदस्यों को किराया देकर HRA लेने वालों पर असर पड़ेगा।
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जानकारों की राय
टैक्स सलाहकारों का मानना है कि यह बदलाव छोटा लगता है, लेकिन डेटा एनालिटिक्स से विभाग आसानी से ITR और AIS (एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट) का मिलान कर सकेगा। अगर मालिक ने किराया अपनी रिटर्न में नहीं दिखाया या संपत्ति उसके नाम नहीं है, तो क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा।
“परिवार को किराया देना वैध रहेगा, लेकिन अब बैंक ट्रांसफर प्रूफ, मालिक की ITR कॉपी और रिश्ते का प्रमाण जरूरी होगा,” कहते हैं विशेषज्ञ। फर्जीवाड़े पर Section 270A के तहत 200% तक पेनल्टी लग सकती है। साथ ही, सालाना किराया 2.4 लाख से ज्यादा होने पर Section 194-I के तहत TDS काटना पड़ेगा। ईमानदार करदाताओं को ज्यादा दस्तावेज जुटाने पड़ेंगे, जिससे विवाद बढ़ने का खतरा है।
नए नियमों का डिटेल विश्लेषण
ड्राफ्ट रूल्स (Rule 205 या Form 12BB में बदलाव) के अनुसार:
- रिश्ता बताना अनिवार्य: माता-पिता, ससुराल या अन्य रिश्तेदार होने पर खुलासा करें।
- TDS नियम: 2.4 लाख रुपये से ऊपर किराए पर 10% TDS।
- HRA गणना वही: छूट तीनों में सबसे कम पर-
एक और बड़ा अपडेट: 50% HRA छूट अब मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई के अलावा बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद में भी मिलेगी। ये शहर हाई रेंट वाले हो गए हैं। बाकी जगह 40% ही। यह पुराने टैक्स रेजीम में लागू होगा; नए रेजीम में HRA बिल्कुल नहीं।
| शहर श्रेणी | पुराना नियम | नया प्रस्ताव (2026) |
|---|---|---|
| मेट्रो (मुंबई आदि) | 50% | 50% |
| नई मेट्रो (बेंगलुरु आदि) | 40% | 50% |
| अन्य शहर | 40% | 40% |
सैलरी पर असर:
मान लीजिए बेसिक सैलरी 50,000 रुपये/माह, HRA 25,000, किराया 20,000। दिल्ली में छूट= न्यूनतम(25,000, 20,000-5,000, 25,000)=15,000। अगर क्लेम रिजेक्ट हुआ तो 15,000 टैक्सेबल, 30% टैक्स पर 4,500/माह नुकसान। परिवार वाले सबसे प्रभावित।
विशेषज्ञ सलाह
- रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट बनवाएं।
- किराया हमेशा बैंक से पेमेंट।
- मालिक की PAN/ITR रखें।
- टैक्स कंसल्टेंट से चेक करवाएं।
ड्राफ्ट पर अभी पब्लिक कमेंट मांगे गए हैं। फाइनल नियम अप्रूवल के बाद ही पक्के होंगे। सैलरीड क्लास को सतर्क रहना होगा, वरना इन-हैंड सैलरी घट सकती है।
















