बाजार में सोने की चमक फीकी पड़ने लगी है। कुछ ही महीनों पहले जहां 10 ग्राम 24 कैरेट सोना डेढ लाख रुपये के पार उछल रहा था, वहां अब तेज गिरावट ने खरीदारों के दिलों में आस बंधा दी है। जानकारों का मानना है कि यह सिलसिला थमने वाला नहीं। आने वाले दिनों में भाव और नीचे लुढ़क सकते हैं, शायद अस्सी हजार रुपये के आसपास भी पहुंच जाएं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह दावा हकीकत बन पाएगा, या फिर बाजार फिर से ऊपर चढ़ेगा।

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रिकॉर्ड ऊंचाई से धड़ाम
पिछले साल की शुरुआत में सोने ने रिकॉर्ड तोड़ा था। वैश्विक तनावों के बीच निवेशक इसे सुरक्षित पनाह मानकर खरीदते रहे। भारत जैसे देश में जहां शादियों और त्योहारों का सीधा असर पड़ता है, वहां मांग चरम पर थी। लेकिन जनवरी के अंत तक हालात बदल गए। बजट पेश होने के बाद बाजार में हड़बड़ी मच गई। दो दिनों में ही तीस हजार रुपये तक की गिरावट दर्ज हुई। फरवरी के मध्य तक दिल्ली सर्राफा बाजार में भाव डेढ लाख चालीस हजार के आसपास स्थिर हो गया। यह गिरावट इतनी तेज थी कि ज्वेलर्स भी हैरान रह गए।
गिरावट के छिपे राज
इस गिरावट की जड़ें गहरी हैं। सबसे बड़ा कारण मुनाफा वसूली है। जब भाव आसमान छूते हैं, तो बड़े निवेशक बिक्री शुरू कर देते हैं। इसके अलावा वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर मजबूत हो गया है। डॉलर की ताकत सोने पर भारी पड़ती है क्योंकि यह वैश्विक व्यापार की मुख्य मुद्रा है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत भी मिल रहे हैं। रूस-यूक्रेन जैसे संघर्षों में शांति की कोशिशें तेज हैं, जिससे सुरक्षित निवेश की जरूरत घटी। केंद्रीय बैंक भी अब कम खरीद रहे हैं। चीन जैसे बड़े बाजारों में खुदरा मांग सुस्त पड़ी है क्योंकि ऊंचे दामों ने ग्राहकों को पीछे धकेल दिया। घरेलू मोर्चे पर भारत में आभूषण खरीदारी घटी, जबकि निवेशक ईटीएफ की ओर मुड़ गए।
ऐतिहासिक सबक
इतिहास गवाह है कि सोने के रिकॉर्ड हाई के बाद हमेशा करेक्शन आता है। पिछले चालीस बरसों में दो बार ऐसी स्थिति बनी जब भाव चालीस प्रतिशत तक लुढ़के। वर्तमान ट्रेंड भी वैसा ही लग रहा। अगर यही सिलसिला चला तो अस्सी हजार या उससे नीचे जाने का खतरा है। लेकिन यह एकदम से नहीं होगा। बाजार धीरे-धीरे नीचे आएगा, जिसमें दो-चार महीने लग सकते हैं।
क्या कहते हैं जानकार?
कुछ विश्लेषक आशावादी हैं। उनका मानना है कि लंबी दौड़ में सोना चमकेगा। सेंट्रल बैंकों की खरीदारी फिर बढ़ सकती है। अगर ब्याज दरें गिरीं तो भाव उछल सकते हैं। एक तरफ जहां शॉर्ट टर्म में गिरावट की बात हो रही, वहीं साल के अंत तक डेढ लाख सत्तर हजार तक पहुंचने की संभावना भी जताई जा रही। भारत में मांग कभी खत्म नहीं होती। त्योहारों का मौसम आने पर फिर उछाल आ सकता है।
निवेशक क्या करें?
सोना खरीदने वालों के लिए यह दोहरी तलवार है। अगर गिरावट जारी रही तो सस्ते में मौका मिलेगा। लेकिन जल्दबाजी न करें। छोटे-छोटे निवेश करें और बाजार पर नजर रखें। डाइवर्सिफाई जरूरी है। सरकारी बॉन्ड या शेयरों पर भी विचार करें। एमसीएक्स ट्रेंड फॉलो करें। लंबे समय के लिए सोना अब भी ठोस विकल्प है, लेकिन शॉर्ट टर्म में सावधानी बरतें।
आगे की राह
बाजार की नजरें अब वैश्विक घटनाओं पर हैं। अगर तनाव बढ़े तो भाव स्थिर हो सकते हैं। अन्यथा गिरावट जारी रहेगी। खरीदार इंतजार करें या स्मार्ट तरीके से उतरें, फैसला आपका। लेकिन एक बात पक्की, सोने का बाजार कभी शांत नहीं बैठता।
















