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पति-पत्नी या पार्टनर के साथ खोल रहे हैं जॉइंट अकाउंट? भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना डूब सकता है आपका सारा पैसा

पति-पत्नी जॉइंट अकाउंट से खर्च शेयर करते हैं, लेकिन 'Either or Survivor' मोड में एक पार्टनर सब पैसा उड़ा सकता है। विवाद-मौत पर कानूनी पचड़े, टैक्स जटिलताएं। नॉमिनी ऐड करें, योगदान ट्रैक रखें। बड़ी सेविंग्स पर्सनल अकाउंट में—विशेषज्ञों की चेतावनी।

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पति-पत्नी या पार्टनर के साथ खोल रहे हैं जॉइंट अकाउंट? भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना डूब सकता है आपका सारा पैसा

आजकल ज्यादातर कपल्स प्रैक्टिकल वजहों से जॉइंट बैंक अकाउंट खोलते हैं। हर महीने ‘तुमने बिल भरा या मैंने?’ वाली बहस खत्म। खर्च पूरी तरह पारदर्शी रहते हैं और रिश्ते में ‘हम’ का भाव मजबूत होता है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि बिना नियम समझे खाता खोलना महंगा पड़ सकता है। एक छोटी गलती से सारी जमा-पूंजी गायब हो सकती है।

ऑपरेशन मोड का फर्क न समझना भारी गलती

बैंक में जॉइंट अकाउंट खोलते समय ऑपरेशन मोड चुनना होता है, जो असली पावर तय करता है। ‘Either or Survivor’ में कोई भी एक पार्टनर अकेले पूरा पैसा निकाल सकता है। इमरजेंसी में सुविधा तो है, लेकिन बिना बताए खर्चा कर दें तो दूसरा बेबस। वहीं ‘Jointly’ मोड में हर ट्रांजेक्शन के लिए दोनों की साइन जरूरी। कंट्रोल ज्यादा, लेकिन काम धीमा। ज्यादातर कपल्स बिना सोचे ‘Either or Survivor’ चुन लेते हैं, जो विवाद में घातक साबित होता है।

एक्सेस और ओनरशिप में बड़ा फर्क

बैंक के लिए दोनों नाम एक्सेस देते हैं, लेकिन पैसा किसका? अगर सारा पैसा एक पार्टनर की सैलरी से आ रहा, तो कानूनी रूप से उसका हक मजबूत। सामान्य दिनों में यह फर्क नजर नहीं आता, लेकिन तलाक, पारिवारिक झगड़ा या विरासत के समय समस्या खड़ी हो जाती है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि योगदान का रिकॉर्ड रखें। बड़ी रकम जॉइंट रखने से बचें।

पार्टनर की मौत के बाद क्या?

‘Either or Survivor’ में जीवित पार्टनर बिना रुकावट खाता चला सकता है। बिल-ईएमआई जारी रहते हैं। लेकिन यह वसीयत या उत्तराधिकार कानून को ओवरराइड नहीं करता। अन्य वारिस दावा कर सकते हैं। बैंक सिर्फ फंड ट्रांसफर करता है, विवाद नहीं सुलझाता। यहीं नॉमिनेशन की अहमियत है। कई कपल सोचते हैं जॉइंट अकाउंट है तो नॉमिनी की जरूरत नहीं – गलत! नॉमिनी से बैंक को साफ पता रहता है कि दोनों न होने पर पैसा किसे मिले। इससे कागजी घमासान बचता है।

क्रेडिट स्कोर और टैक्स के जाल

सेविंग अकाउंट से क्रेडिट स्कोर मर्ज नहीं होते। लेकिन चेक बाउंस, ओवरड्राफ्ट या कानूनी रिकवरी में दोनों जिम्मेदार। एक पार्टनर का कर्ज दूसरे के खाते पर असर डाल सकता है। टैक्स में भी उलझन – ब्याज 50-50 टैक्सेबल नहीं। जो पैसा डालेगा, उसके स्लैब में जुड़ेगा। ट्रैक न रखा तो नोटिस आ सकता है।

कब है जॉइंट अकाउंट सबसे सुरक्षित?

एक्सपर्ट इसे ‘ऑपरेटिंग अकाउंट’ मानते हैं – सैलरी आए, घर का खर्च निकले, बैलेंस ज्यादा न पड़े। लंबी सेविंग्स के लिए पर्सनल अकाउंट बेहतर। बड़ी पूंजी जॉइंट रखने से मनमुटाव, कानूनी पचड़े और नुकसान का खतरा। कपल्स को सलाह: खाता खोलने से पहले लिखित नियम पढ़ें, नॉमिनी ऐड करें, मोड समझें। अगर रिश्ते में तनाव की आशंका तो जॉइंट से परहेज करें। सही प्लानिंग से जॉइंट अकाउंट रिश्ते मजबूत कर सकता है, गलत फैसले से बर्बाद।

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info@gurukulbharti.in

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