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वेटिंग टिकट की टेंशन खत्म! रेलवे के ये 2 नए नियम दिलाएंगे आपको कंफर्म सीट, यात्रा से पहले जान लें ये सीक्रेट अपडेट

वेटिंग टिकट की टेंशन खत्म! भारतीय रेलवे ने वेटिंग टिकट पर सख्ती और स्टाफ बर्थ कटौती के दोहरे नियम लागू कर कन्फर्म सीटों की गारंटी दी। 1 जनवरी 2026 से SL-एसी में WL यात्रा बंद, चार्ट 10 घंटे पहले। एसी कोच खाली, राजस्व में करोड़ों का उछाल। यात्रियों को राहत, स्टाफ यूनियन नाराज।

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railway confirm seat rule change

भारतीय रेलवे ने यात्रियों की लंबे समय की शिकायतों का अंत करने के लिए दो बड़े नीतिगत बदलावों का ऐलान किया है। एक ओर वेटिंग टिकट (WL) पर यात्रा पर सख्त पाबंदी लगाकर कन्फर्म सीटों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ ऑन-बोर्ड स्टाफ की बर्थ आवंटन में कटौती कर रेलवे अपनी आय में भारी उछाल लाने की तैयारी में जुटा है। इन बदलावों से न केवल लाखों यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि रेलवे का राजस्व भी प्रतिदिन करोड़ों रुपये बढ़ेगा।

नए नियम क्या कहते हैं?

पहले नए नियम की बात करें तो 1 जनवरी 2026 से स्लीपर क्लास (SL) और सभी एसी कोचों (1A, 2A, 3A) में WL टिकट पर यात्रा पूरी तरह प्रतिबंधित हो गई है। चार्ट तैयार होने के बाद WL टिकट अमान्य घोषित कर दिए जाएंगे, जिससे ओवरबुकिंग और कोचों में अवैध यात्रा की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी। अब प्रत्येक कोच में WL टिकटों की संख्या कुल सीटों के महज 25 प्रतिशत तक सीमित रहेगी। मसलन, 100 सीटों वाले कोच में अधिकतम 25 WL टिकट ही जारी होंगे।

इसके अलावा, रिजर्वेशन चार्ट अब ट्रेन छूटने से 10 घंटे पहले तैयार होगा, खासकर सुबह 5 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलने वाली गाड़ियों के लिए। इससे यात्रियों को पहले ही पता चल जाएगा कि उनका टिकट कन्फर्म हुआ या कैंसिल, और आखिरी वक्त की अफरा-तफरी बंद हो जाएगी।

ग्रुप बुकिंग और सुरक्षा पर खास फोकस

ग्रुप बुकिंग में भी साफ नियम है- अगर चार यात्रियों में दो टिकट कन्फर्म और दो WL रहें, तो सिर्फ कन्फर्म वाले ही सफर कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम सुरक्षा को मजबूत करेंगे, क्योंकि पहले WL यात्रियों से विवाद, चोरी और दुर्घटनाएं आम थीं। IRCTC ऐप पर स्टेटस चेक करने और वैकल्पिक ट्रेनें चुनने की सलाह दी जा रही है।

स्टाफ बर्थ कटौती

दूसरा क्रांतिकारी बदलाव ऑन-बोर्ड स्टाफ (एसी/वेंडिंग स्टाफ) की बर्थ नीति में है, जो सीधे रेलवे के राजस्व को लक्षित करता है। पुराने सर्कुलर (2016 और 2018) रद्द कर दिए गए हैं। अब एसी फर्स्ट और सेकंड क्लास में स्टाफ को एक भी बर्थ ब्लॉक नहीं होगी। ये कीमती सीटें अब यात्रियों के लिए खुली रहेंगी, जिससे प्रीमियम कोचों से कमाई में इजाफा होगा। राजधानी-दुरंतो जैसी हाई-स्पीड ट्रेनों में स्टाफ को सिर्फ थर्ड एसी में दो बर्थ मिलेंगी। स्लीपर ट्रेनों में उन्हें स्लीपर क्लास ही आवंटित होगी।

हाउसकीपिंग और वेंडिंग स्टाफ के लिए दिशानिर्देश

हाउसकीपिंग स्टाफ (OBHS) के लिए ‘स्प्रेड मॉडल’ लागू होगा, जिसमें स्लीपर या थर्ड एसी में सिर्फ साइड लोअर की चार बर्थ दी जाएंगी। वेंडिंग स्टाफ के मामले में जहां पेंट्री कार है, वहां कोच में एक भी सीट नहीं मिलेगी- उन्हें पेंट्री में ही रहना पड़ेगा। पेंट्री रहित ट्रेनों में महज दो सीटें। रेलवे बोर्ड के निदेशक (पैसेंजर मार्केटिंग) संजय मनोचा ने सभी जोनल महाप्रबंधकों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

कितना फायदा होगा रेलवे को?

अब आंकड़ों पर नजर डालें। हर ट्रेन में औसतन 4-6 सीटें स्टाफ के नाम पर खाली पड़ी रहती थीं, जिससे रेलवे को प्रतिदिन लाखों रुपये का किराया नुकसान होता था। अक्सर ये बर्थ दुरुपयोग में भी आ जाती थीं। नई व्यवस्था से वेटिंग लिस्ट छोटी होगी, टिकट कालाबाजारी रुकेगी और प्रीमियम किराए से खजाना भरेगा। एक अनुमान के मुताबिक, इससे सालाना सैकड़ों करोड़ का फायदा होगा।

यात्रियों और स्टाफ की प्रतिक्रिया

यात्रियों ने इसे स्वागतयोग्य बताया है। दिल्ली के एक यात्री ने कहा, “अब WL की चिंता नहीं, कन्फर्म टिकट ही लूंगा।” रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ये बदलाव संसाधनों के इष्टतम उपयोग और सुरक्षा के लिए हैं। हालांकि, स्टाफ यूनियनों ने आपत्ति जताई है, लेकिन रेलवे इसे अपरिहार्य बता रहा है। कुल मिलाकर, ये दोहरे नियम रेल यात्रा को और सुगम बनाएंगे। अधिक जानकारी के लिए IRCTC वेबसाइट चेक करें।

Author
info@gurukulbharti.in

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