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होटल ने बिल में जोड़ा ‘सर्विस चार्ज’? तुरंत करें ये काम, रेस्तरां पर लगेगा ₹50,000 का जुर्माना; सरकार ने बदला नियम

ग्राहक अब न डरें! जबरन सर्विस चार्ज वैकल्पिक है। शिकायत करो, पैसा वापस लो और दुकान पर भारी जुर्माना लगवा दो। सरकारी नियम सख्त, अदालत ने मंजूरी दी। आसान स्टेप्स से बचो झगड़े से, जानो अपने हक।

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खाने का मजा तो हर बार अच्छा लगता है, लेकिन बिल में अचानक चढ़ा सर्विस चार्ज मूड खराब कर देता है। अब अच्छी खबर है कि सरकारी नियमों ने ग्राहकों को मजबूत हथियार दे दिया है। होटल या रेस्तरां अगर बिल में सर्विस चार्ज जबरन जोड़ते हैं, तो उन पर भारी जुर्माना लगेगा। यह राशि 50 हजार रुपये तक हो सकती है। नियम साफ हैं कि सर्विस चार्ज ग्राहक की मर्जी पर निर्भर है, न कि दुकानदार की जिद पर।

होटल ने बिल में जोड़ा 'सर्विस चार्ज'? तुरंत करें ये काम, रेस्तरां पर लगेगा ₹50,000 का जुर्माना; सरकार ने बदला नियम

क्या कहते हैं ताजा नियम

सरकार ने कुछ साल पहले ही साफ कर दिया था कि बिल में सर्विस चार्ज अपने आप नहीं जुड़ सकता। यह पूरी तरह वैकल्पिक होना चाहिए। ग्राहक अगर नहीं देना चाहे, तो रेस्तरां को हटाना ही पड़ेगा। बिल पर साफ लिखा होना चाहिए कि यह चार्ज देने या न देने का फैसला ग्राहक का है। कभी-कभी दुकानदार इसे छिपाकर दूसरे नाम से वसूलते हैं, जैसे स्टाफ मदद फंड या सर्विस फीस। ऐसा करना भी गलत है और सजा के दायरे में आता है। अदालतों ने भी इन नियमों को हरी झंडी दे दी है। अब कोई बहाना नहीं चलेगा।

ग्राहक को क्या फायदा मिला

पहले ग्राहक चुप रह जाते थे, क्योंकि झगड़ा करने का मन न होता। अब हालात बदल गए हैं। हाल के महीनों में कई रेस्तरां पर कार्रवाई हुई है। इनमें बिल सुधारना, पैसे वापस करना और जुर्माना भरना शामिल रहा। सैकड़ों शिकायतों पर तुरंत एक्शन लिया गया। इसका असर यह हुआ कि बड़े चेन वाले होटल भी सतर्क हो गए। ग्राहक को न सिर्फ चार्ज हटाने का हक मिला, बल्कि पूरा पैसा भी वापस हो जाता है। यह बदलाव आम लोगों के लिए बड़ी राहत है, खासकर जब महंगाई आसमान छू रही हो।

शिकायत कैसे करें?

सबसे आसान तरीका है बिल देखते ही बोल देना। रेस्तरां वाले चार्ज हटा देंगे। अगर मना करें, तो फोन उठाएं और उपभोक्ता हेल्पलाइन पर कॉल करें। नंबर 1915 है, जो मुफ्त है। या फिर सरकारी वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन शिकायत भरें। इसमें बिल की फोटो, दुकान का नाम, पता और तारीख डालें। जांच के बाद 15 से 30 दिन में फैसला आ जाता है। कई बार तो उसी दिन पैसा मिल जाता है। यह प्रक्रिया तेज और आसान है। कोई वकील या कोर्ट की जरूरत नहीं।

रेस्तरां वालों की क्या मजबूरी?

दुकानदार अक्सर कहते हैं कि यह पैसा स्टाफ के लिए जाता है। लेकिन नियम यही कहते हैं कि टिप ग्राहक की खुशी पर हो। जीएसटी वाले चार्ज पर भी रोक है। कुछ जगहों पर मेन्यू के दाम बढ़ा दिए गए हैं, लेकिन जबरन चार्ज अब बंद। देश के कोने-कोने में ढाबे, कैफे और लग्जरी रेस्तरां इसकी जद में हैं। अमृतसर जैसे शहरों में लोकल खाने की दुकानों पर भी निगाहें हैं। संगठनों का कहना है कि इससे उपभोक्ता जागरूकता बढ़ेगी।

यह कदम साबित करता है कि ग्राहक अब कमजोर नहीं। अगली बार बिल चेक करना न भूलें। आपका एक छोटा कदम बड़े बदलाव ला सकता है। जागरूक रहें, अपने हक के लिए लड़ें।

Author
info@gurukulbharti.in

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