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सावधान क्रेडिट कार्ड यूजर्स! 1 अप्रैल से इनकम टैक्स के 5 सख्त नियम लागू, ₹1 लाख से ज्यादा खर्च किया तो आ सकता है नोटिस

नए टैक्स नियमों से लाखों लोग फंस सकते हैं। नकद बिल भरा तो सीधा नोटिस! आय-खर्च मैच न हुआ तो जांच। बचने के आसान तरीके जान लो, वरना परेशानी पक्की। अभी पढ़ो और सावधान हो जाओ!

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क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करने वाले हर व्यक्ति को सावधान हो जाना चाहिए। आगामी वित्त वर्ष से आयकर विभाग उच्च मूल्य के लेन-देन पर कड़ी निगरानी रखेगा। अगर आपका सालाना बिल एक लाख रुपये से अधिक पहुंचता है, तो विभाग का नोटिस घर तक पहुंच सकता है। ये बदलाव आय और व्यय के बीच संतुलन जांचने के उद्देश्य से लाए जा रहे हैं, ताकि अनियमित धन प्रवाह पर रोक लगे।

सावधान क्रेडिट कार्ड यूजर्स! 1 अप्रैल से इनकम टैक्स के 5 सख्त नियम लागू, ₹1 लाख से ज्यादा खर्च किया तो आ सकता है नोटिस

नए नियम क्या कहते हैं?

पहला बड़ा नियम नकद भुगतान से जुड़ा है। अगर कोई व्यक्ति अपने क्रेडिट कार्ड का बिल एक लाख रुपये या उससे ज्यादा नकद चुकाता है, तो बैंक को इसकी सूचना आयकर विभाग को देनी पड़ेगी। दूसरा नियम अन्य डिजिटल माध्यमों पर लागू होता है। दस लाख रुपये से ऊपर का कोई भी बिल, चाहे वह यूपीआई, चेक या बैंक हस्तांतरण से भरा जाए, ट्रैक किया जाएगा। तीसरा, विदेश यात्रा या विदेशी खरीदारी से जुड़े लेन-देन पर विशेष ध्यान रहेगा, क्योंकि इनमें कैश निकासी की संभावना अधिक होती है।

चौथा नियम आयकर रिटर्न से सीधा जुड़ता है। अगर रिटर्न में बताई गई कमाई के मुकाबले कार्ड खर्च कहीं अधिक दिखता है, तो विभाग स्रोत की मांग करेगा। उदाहरणस्वरूप, दस लाख की आय बताने वाला व्यक्ति अगर पचास लाख का बिल भरता है, तो स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। पांचवां नियम जांच की अवधि तय करता है। पचास लाख तक के मामलों में तीन साल और इससे अधिक में छह साल तक पुरानी जानकारी की जांच हो सकेगी।

नोटिस कैसे और क्यों जारी होता है?

विभाग पहले से ही उच्च बिलों की जानकारी एकत्र करता है। वार्षिक सूचना विवरण और फॉर्म 26AS में ये विवरण दर्ज होते हैं। अगर इनमें कोई विसंगति नजर आती है, तो तुरंत पत्र भेजा जाता है। एक सामान्य उदाहरण लें, जहां किसी ने एक करोड़ से अधिक का बिल भरा लेकिन रिटर्न में आय कम दिखाई। ऐसे मामलों में विभाग अनघोषित आय मानकर कार्रवाई करता है। मध्यम वर्ग से लेकर व्यवसायियों तक सभी प्रभावित हो सकते हैं।

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बचाव के सरल तरीके

नोटिस से बचना आसान है अगर सावधानी बरती जाए। बिल हमेशा डिजिटल तरीके से चुकाएं, नकद से पूरी तरह परहेज करें। अपनी वार्षिक सूचना नियमित जांचें और रिटर्न में हर खर्च का स्रोत साफ बताएं। यदि कंपनी का कार्ड है, तो आधिकारिक खर्चों के प्रमाण रखें। निजी उपयोग पर कर लग सकता है। छोटे बिल जीरो टैक्स स्लैब में फिट हो सकते हैं, लेकिन उच्च आय पर बोझ बढ़ेगा।

बदलावों का व्यापक असर

देश भर में करोड़ों कार्ड उपयोगकर्ता हैं। ये नियम डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करेंगे लेकिन अनुपालन की जिम्मेदारी भी बढ़ाएंगे। ड्राफ्ट अभी चर्चा में है, अंतिम अधिसूचना मार्च तक आ सकती है। सतर्क रहें, क्योंकि सही दस्तावेजीकरण ही सबसे मजबूत ढाल है। करदाता अब से तैयारी शुरू कर दें, ताकि अप्रैल से कोई परेशानी न हो। 

Author
info@gurukulbharti.in

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