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दुनिया में बढ़ा भारत का दबदबा! RBI के पास है इतने हजार टन सोने का भंडार, गोल्ड रैंकिंग देख उड़ जाएंगे होश

सोने की कीमतें 48% चढ़कर $3,896/औंस पर पहुंचीं। RBI के 880 टन भंडार ने भारत को टॉप-10 में छठा स्थान दिलाया। अमेरिका (8133 टन) शीर्ष पर, चीन-जापान पीछे। सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी से वैश्विक रिजर्व 36,359 टन। 2025 में RBI ने 3.8 टन जोड़ा। फॉरेक्स ($717 अरब) मजबूत, निवेश का सुनहरा मौका!

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दुनिया में बढ़ा भारत का दबदबा! RBI के पास है इतने हजार टन सोने का भंडार, गोल्ड रैंकिंग देख उड़ जाएंगे होश

सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं। पिछले साल से अब तक गोल्ड करीब 48 प्रतिशत महंगा हो चुका है और वर्तमान में $3,896 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर ट्रेड कर रहा है। इसका प्रमुख कारण सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी है, जैसा कि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है। ऐसे में भारत का रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भी सोने के भंडार को लगातार मजबूत कर रहा है, जो देश की आर्थिक ताकत का प्रतीक बन गया है।

RBI के पास सितंबर 2025 तक 880.18 मीट्रिक टन सोना मौजूद है, जिसमें से 575.8 टन भारत में और बाकी विदेशी बैंकों में सुरक्षित है। फरवरी 2026 तक कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं हुआ, लेकिन यह भंडार भारत को दुनिया के टॉप-10 देशों में छठे स्थान पर कायम रखे हुए है।

वैश्विक सोना भंडार

वैश्विक स्तर पर सेंट्रल बैंकों के पास कुल 36,359 टन सोना भंडार है। WGC की नवीनतम डेटा के अनुसार, शीर्ष पर अमेरिका काबिज है, जिसके पास 8,133.5 टन सोना है। उसके बाद जर्मनी (3,350.3 टन), IMF (2,814 टन), इटली (2,451.8 टन) और फ्रांस (2,437 टन) का स्थान है।

एशियाई देशों की स्थिति

एशिया में चीन तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसकी होल्डिंग 2,300 टन से अधिक हो चुकी है। जापान 846 टन के साथ 10वें स्थान पर है। भारत 880 टन के साथ स्विट्जरलैंड (1,040 टन) के ठीक बाद छठे-सातवें पायदान पर आता है, जो पहले की रिपोर्ट्स में नौवें स्थान से सुधार दर्शाता है। यह रैंकिंग ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स और WGC के आंकड़ों पर आधारित है।

रैंकदेशसोना भंडार (टन में)
1अमेरिका8,133.5
2जर्मनी3,350.3
3IMF2,814
4इटली2,451.8
5फ्रांस2,437
6-7भारत880
10जापान846

सेंट्रल बैंकों की खरीदारी

2024-25 में RBI ने करीब 72-73 टन सोना जोड़ा, जिसमें जनवरी में 2.8 टन, मार्च में 0.6 टन और जून में 0.4 टन शामिल हैं। कुल मिलाकर 2025 में 3.8 टन की खरीद दर्ज हुई। अगस्त 2025 तक यह 888 टन तक पहुंचा था। वैश्विक रूप से सेंट्रल बैंकों ने अगस्त में 15 टन सोना जोड़ा।

अन्य देशों की प्रगति

कजाकिस्तान ने 8 टन बढ़ाकर 316 टन किया, पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने 2 टन जोड़कर 2,300 टन पार किया, जबकि बुल्गारिया ने 2 टन खरीदकर 43 टन पहुंचा। यह खरीदारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, मुद्रास्फीति और डॉलर की अस्थिरता से प्रेरित है। सोना अब विदेशी मुद्रा विविधीकरण का प्रमुख साधन बन चुका है।

भारत के लिए महत्व

भारत के संदर्भ में यह भंडार फॉरेक्स रिजर्व ($717 बिलियन) का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका मूल्य $95-123 बिलियन के बीच अस्थिर रहता है। RBI की यह रणनीति देश को वैश्विक मंच पर मजबूत बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में निवेश सुरक्षित रिटर्न देता है, खासकर खुदरा निवेशकों के लिए। हालांकि, फरवरी 2026 में फॉरेक्स रिजर्व में $6.7 बिलियन की गिरावट आई, जिसमें गोल्ड होल्डिंग्स ने भूमिका निभाई। WGC के अनुसार, सेंट्रल बैंकों की मांग से सोने की कीमतें और चढ़ेंगी। भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए यह सुनहरा अवसर है।

कुल मिलाकर, भारत का सोने का दबदबा बढ़ रहा है। RBI की नीतियां न केवल आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित कर रही हैं, बल्कि वैश्विक रैंकिंग में भी ऊंचा स्थान दिला रही हैं। निवेशक अब सोने पर नजर रखें, क्योंकि यह महंगाई के दौर में सबसे सुरक्षित परिसंपत्ति साबित हो रहा है।

Author
info@gurukulbharti.in

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