
उत्तराखंड सरकार ने पृथक राज्य आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आंदोलनकारियों को दी जाने वाली मासिक पेंशन में 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस निर्णय को राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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किन-किन श्रेणियों में हुई कितनी बढ़ोतरी?
राज्य सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, अलग-अलग श्रेणियों में पेंशन राशि को संशोधित किया गया है।
1. जेल गए या घायल आंदोलनकारी
अधिकारियों ने बताया कि राज्य आंदोलन के दौरान सात दिन के लिए जेल गए या घायल हुए आंदोलनकारियों की पेंशन 6,000 रुपये से बढ़ाकर अब 7,000 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। यानी इस श्रेणी में 1,000 रुपये की मासिक बढ़ोतरी की गई है।
2. अन्य पात्र आंदोलनकारी
इस श्रेणी के अतिरिक्त अन्य पात्र आंदोलनकारियों की पेंशन राशि 4,500 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। इससे इन लाभार्थियों को भी हर महीने 1,000 रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
3. विकलांग एवं पूर्ण रूप से बिस्तर पर आश्रित आंदोलनकारी
राज्य आंदोलन के दौरान गंभीर रूप से घायल होकर विकलांग हुए या पूर्ण रूप से बिस्तर पर आश्रित आंदोलनकारियों के लिए सरकार ने विशेष पेंशन में बड़ा इजाफा किया है। पहले इन्हें 20,000 रुपये प्रतिमाह मिलते थे, जिसे बढ़ाकर अब 30,000 रुपये कर दिया गया है।
इस श्रेणी में 10,000 रुपये की सीधी वृद्धि की गई है, जो कुल मिलाकर सबसे अधिक बढ़ोतरी है।
4. शहीद आंदोलनकारियों के आश्रित
राज्य आंदोलन में जान गंवाने वाले आंदोलनकारियों के आश्रितों की पेंशन भी 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। इस वर्ग में 2,500 रुपये की वृद्धि की गई है।
मुख्यमंत्री का बयान सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस फैसले को राज्य आंदोलनकारियों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार आंदोलनकारियों के सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह निर्णय उन लोगों और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है, जिन्होंने अलग राज्य के निर्माण के लिए संघर्ष किया और कई कठिनाइयों का सामना किया।
सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम
राज्य गठन की प्रक्रिया में अनेक लोगों ने जेल यात्राएं कीं, शारीरिक चोटें झेलीं और कई परिवारों ने अपने सदस्यों को खोया। ऐसे में पेंशन वृद्धि का यह निर्णय न केवल आर्थिक सहयोग है, बल्कि नैतिक समर्थन भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए पेंशन राशि में वृद्धि आवश्यक थी। खासकर विकलांग और पूर्ण रूप से आश्रित आंदोलनकारियों के लिए 30,000 रुपये प्रतिमाह की पेंशन उन्हें बेहतर चिकित्सा और देखभाल की सुविधा दिलाने में सहायक होगी।
सरकार की प्राथमिकता में आंदोलनकारी
हाल के वर्षों में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसी क्रम में यह निर्णय भी लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, पेंशन में की गई यह वृद्धि शीघ्र ही प्रभावी होगी और पात्र लाभार्थियों को संशोधित राशि मिलना शुरू हो जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि जिन लोगों के संघर्ष के कारण आज उत्तराखंड एक अलग पहचान और प्रशासनिक ढांचे के साथ खड़ा है, उनके जीवन स्तर में सुधार लाना सरकार की जिम्मेदारी है।
कितना होगा सीधा फायदा?
यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो-
- 1,000 रुपये की बढ़ोतरी सामान्य श्रेणी के आंदोलनकारियों के लिए
- 1,000 रुपये की वृद्धि जेल गए या घायल आंदोलनकारियों के लिए
- 10,000 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी विकलांग और पूर्ण आश्रित आंदोलनकारियों के लिए
- 2,500 रुपये की वृद्धि शहीद आंदोलनकारियों के आश्रितों के लिए
यह संशोधन राज्य के हजारों लाभार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेगा।
















