
भारतीय पासपोर्ट की ताकत बढ़ रही है। हेनली पासपोर्ट इंडेक्स की फरवरी 2026 की ताजा रैंकिंग में भारत 80वें से सुधरकर 75वें स्थान पर पहुंच गया है। यह सुधार 5 पायदानों का है, जो साल की शुरुआत में दर्ज किया गया। अब भारतीय नागरिक 56 देशों में वीजा-मुक्त, वीजा-ऑन-अराइवल या ई-वीजा से यात्रा कर सकते हैं। गैबन, मेडागास्कर जैसे देशों के साथ साझा यह रैंक भारत की बढ़ती कूटनीतिक सफलता को दर्शाती है।
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सिंगापुर शीर्ष पर कायम
हेनली इंडेक्स, जो IATA डेटा पर आधारित 199 पासपोर्ट्स की 227 डेस्टिनेशन्स तक पहुंच मापता है, में एशियाई देशों का जलवा बरकरार है। सिंगापुर पहले स्थान पर बरकरार है, जिसके पासपोर्ट से 190+ देशों में आसान प्रवेश है। जापान और दक्षिण कोरिया संयुक्त दूसरे (185+ देश), जबकि यूएई ने 5 पायदे चढ़कर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे पश्चिमी दिग्गजों की रैंकिंग में गिरावट आई है। अमेरिका, जो कभी टॉप-10 में था, अब 10वें स्थान पर खिसक गया, जहां केवल 179 देशों तक पहुंच है। ब्रिटेन भी पिछले दशक में नीचे गिरा है। यह बदलाव वैश्विक भू-राजनीति और नए समझौतों का परिणाम है।
भारत की प्रगति के पीछे कूटनीति की भूमिका
भारत का यह उछाल थाईलैंड, मालदीव, इंडोनेशिया जैसे देशों से हालिया वीजा समझौतों का नतीजा है। 2025 में 85वें से 2026 जनवरी में 80वें और अब फरवरी में 75वें स्थान तक का सफर भारत की आर्थिक साख और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का प्रमाण है। हालांकि, भारत की ऐतिहासिक सर्वश्रेष्ठ रैंक 2006 की 71वीं रही। पड़ोसी देशों में नेपाल (96वां, 35 देश), बांग्लादेश (95वां, 37) और पाकिस्तान (98वां) पीछे हैं, जबकि अफगानिस्तान सबसे निचले पायदान पर (101वां, 24 देश) है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत टॉप-50 का लक्ष्य हासिल करने के लिए यूरोप और अफ्रीका में और समझौते कर सकता है।
रैंकिंग का महत्व और चुनौतियां
हेनली इंडेक्स साल में दो बार (जनवरी, जुलाई) अपडेट होता है और यात्रा स्वतंत्रता का वैश्विक बेंचमार्क है। भारत के लिए यह प्रगति पर्यटन, व्यापार और एनआरआई यात्राओं को बढ़ावा देगी। लेकिन चुनौतियां बरकरार हैं- कई विकसित देशों में सख्त वीजा नियम बने हुए हैं। सरकार की ‘अ्टल पासपोर्ट सेवा’ और डिजिटल पहल से प्रक्रिया आसान हुई है, लेकिन रैंकिंग सुधार लंबी कूटनीतिक प्रक्रिया पर निर्भर है। विपक्षी नेता इसे सकारात्मक बताते हुए और तेज सुधार की मांग कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “यह भारत की वैश्विक साख का प्रमाण है। हम और द्विपक्षीय समझौतों पर काम कर रहे हैं।” यात्रा विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक विकास और G20 जैसी भूमिकाएं भविष्य में इसे मजबूत बनाएंगी। कुल मिलाकर, 75वां स्थान उत्साहजनक है, लेकिन शीर्ष एशियाई पासपोर्ट्स से दूरी बनी हुई है। भारतीय यात्रियों के लिए अब दुबई, थाईलैंड जैसे लोकप्रिय डेस्टिनेशन्स आसान हो गए हैं। यह रैंकिंग न केवल पासपोर्ट की ताकत, बल्कि भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षा को भी प्रतिबिंबित करती है।
















