
आज के दौर में हर कोई अपने रिटायरमेंट को सुरक्षित बनाने के चक्कर में है। नौकरीपेशा लोग, किसान, छोटे व्यापारी- सभी भविष्य की चिंता में डूबे हैं। लेकिन क्या हो अगर आप सिर्फ ₹3 लाख का एकमुश्त निवेश करके 30 साल तक हर महीने पेंशन जैसी आय हासिल कर लें? यह कोई जुमला नहीं, बल्कि म्यूचुअल फंड्स के ‘सिस्टेमैटिक विथड्रॉल प्लान’ (SWP) का कमाल है। बाजार आधारित यह प्लान सरकारी पेंशन स्कीम्स से कहीं ज्यादा लचीला और फायदेमंद साबित हो रहा है, हालांकि इसमें जोखिम भी छिपा है।
आज के समय में निवेश का चलन बढ़ा है। लोग अपनी और परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए SIP, RD जैसी योजनाओं पर भरोसा कर रहे हैं। लेकिन कईयों को लगता है कि लंबे समय तक थोड़ा-थोड़ा निवेश करना मुश्किल है। यहीं SWP रिटर्न बनता है- एक बार ₹3 लाख जमा करें, फिर 30 साल तक मासिक आय का सुख भोगें। विशेषज्ञों का कहना है कि 10-12% औसत रिटर्न पर यह संभव है, क्योंकि कंपाउंडिंग जादू बुनती रहती है।
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SWP कैसे काम करता है?
SWP म्यूचुअल फंड का एक हिस्सा है, जहां आप इक्विटी, हाइब्रिड या डेट फंड में लंपसम निवेश करते हैं। फिर फंड हाउस को निर्देश दें कि हर महीने तय राशि (जैसे ₹1,000-₹2,000) आपके बैंक खाते में ट्रांसफर करे। बची राशि निवेश बनी रहती है और रिटर्न कमाती रहती है। उदाहरण लें: ₹3 लाख पर 10% वार्षिक रिटर्न मानें। सालाना ₹30,000 ब्याज बनेगा। अगर आप ₹18,000 (₹1,500/माह) निकालें, तो शेष राशि बढ़ती जाएगी। 30 साल बाद कोष न सिर्फ सुरक्षित रहेगा, बल्कि ₹10 लाख तक पहुंच सकता है।
यह प्लान रिटायरमेंट के लिए परफेक्ट है। मान लीजिए आप 40 साल के हैं- 70 तक पेंशन मिलती रहेगी। टैक्स में भी राहत: लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर सिर्फ 12.5% टैक्स। महंगाई को देखते हुए 8% रियल रिटर्न भी काफी है।
SWP के फायदे
- लचीलापन: निकासी राशि खुद तय करें। जरूरत पर पूरा पैसा भी निकाल सकते हैं।
- बेहतर रिटर्न: पेंशन योजनाओं (6-7%) से दोगुना। महंगाई को मात देता है।
- कंपाउंडिंग का कमाल: बची पूंजी पर ब्याज पर ब्याज मिलता रहता है।
- आसान प्रक्रिया: Zerodha, Groww जैसे ऐप्स से 10 मिनट में शुरू। न्यूनतम KYC ही काफी।
उदाहरण से समझें- 8% रिटर्न पर ₹2,000 मासिक निकासी से ₹3 लाख 30 साल बरकरार रहता है। 12% पर तो कोष दोगुना हो जाता है।
नुकसान: जोखिम को नजरअंदाज न करें
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। SWP में कोई गारंटी नहीं- सब शेयर बाजार पर निर्भर। अगर मार्केट क्रैश हो (जैसे 2008 या 2020), तो कोष 50% तक गिर सकता है। लंबे मंदी में पेंशन रुक सकती है। इसलिए डेट फंड्स या हाइब्रिड चुनें। नौसिखियों के लिए सलाह: 60% इक्विटी, 40% डेट।
सरकारी विकल्पों से तुलना
पोस्ट ऑफिस SCSS या NSC सुरक्षित हैं, लेकिन ₹15 लाख से ज्यादा लगते हैं और मैच्योरिटी सिर्फ 5 साल। NPS लंबा है, लेकिन विदड्रॉल सीमित। SWP इनसे आगे- कोई लॉक-इन नहीं।
विशेषज्ञ सलाह: कैसे शुरू करें?
वित्तीय प्लानर राजेश कुमार कहते हैं, “SWP उन लोगों के लिए जो मध्यम जोखिम ले सकें। पहले 6 महीने ट्रायल करें।” स्टेप्स: 1) फंड चुनें (HDFC Balanced Advantage), 2) SWP सेट करें, 3) SIP टॉप-अप जोड़ें। हमेशा SEBI रजिस्टर्ड एडवाइजर से कंसल्ट करें। कुल मिलाकर, ₹3 लाख SWP रिटायरमेंट का स्मार्ट हैक है। लेकिन सावधानी बरतें – जल्दबाजी न करें। सुरक्षित भविष्य के लिए आज ही प्लानिंग शुरू करें!
















