
मोदी सरकार ने देश के श्रम कानूनों में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए नया लेबर कोड लागू कर दिया है, इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन कर्मचारियों को मिलेगा जो अक्सर बेहतर अवसरों के लिए नौकरियां बदलते रहते हैं, अब तक ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की निरंतर सेवा अनिवार्य थी, लेकिन नए नियमों ने इस दीवार को गिरा दिया है।
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क्या है नया ‘फिक्स्ड टर्म’ नियम?
नए नियमों के तहत ‘फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉई’ (Fixed-Term Employees – FTE) यानी वे कर्मचारी जो एक निश्चित समय के अनुबंध (Contract) पर काम करते हैं, अब मात्र 1 साल (कम से कम 240 दिन) की सेवा पूरी करने पर ही ग्रेच्युटी के हकदार होंगे, यह नियम विशेष रूप से उन लोगों के लिए वरदान साबित होगा जो आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और प्रोजेक्ट-आधारित क्षेत्रों में काम करते हैं।
नियमित कर्मचारियों का क्या होगा?
ध्यान देने वाली बात यह है कि नियमित (Permanent) कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी पाने की न्यूनतम अवधि अभी भी 5 साल ही बरकरार रखी गई है, हालांकि, यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है या वह दुर्घटना के कारण अक्षम हो जाता है, तो उसे 5 साल की शर्त से छूट मिलती है।
सैलरी स्ट्रक्चर में भी बड़ा बदलाव
सरकार ने ग्रेच्युटी की गणना के लिए वेतन की परिभाषा को भी बदल दिया है, नए प्रावधानों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी का मूल वेतन (Basic Pay) उसकी कुल CTC (Cost to Company) का कम से कम 50% होना अनिवार्य है, इससे कर्मचारियों के पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी फंड में योगदान बढ़ जाएगा, जिससे रिटायरमेंट के समय मिलने वाली राशि में 25% से 50% तक का इजाफा हो सकता है।
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मुख्य बिंदु जो आपको जानने चाहिए
- फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए 5 साल के बजाय अब सिर्फ 1 साल।
- कर्मचारी के नौकरी छोड़ने या अनुबंध खत्म होने के 30 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा।
- भुगतान में देरी होने पर नियोक्ता (Employer) को 10% तक का जुर्माना या ब्याज देना पड़ सकता है।
- ग्रेच्युटी पर ₹20 लाख तक की राशि अभी भी पूरी तरह टैक्स फ्री बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि गिग इकोनॉमी और कॉन्ट्रैक्ट वर्क फोर्स को भी मुख्यधारा के लाभों से जोड़ेगा, Union Labour Ministry के अनुसार, इस सुधार का उद्देश्य भारत के श्रम बाजार को लचीला और श्रमिक-हितैषी बनाना है।
















