
बीते 48 घंटों में बिटकॉइन की कीमतों में आई सुनामी ने क्रिप्टो निवेशकों के बीच हड़कंप मचा दिया है, बिटकॉइन की कीमत अपने हालिया शिखर से लगभग 50% गिरकर $60,000 (~₹50.3 लाख) के स्तर पर आ गई है।
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भारी लिक्विडेशन (Massive Liquidations)
बाजार में आई गिरावट ने एक ‘डोमिनो इफेक्ट’ पैदा किया, पिछले 24 घंटों में करीब $2.71 बिलियन (~₹22,700 करोड़) की ट्रेडिंग पोजीशन लिक्विडेट (खत्म) हो गई हैं, इसमें सबसे ज्यादा नुकसान उन निवेशकों को हुआ जिन्होंने बाजार के ऊपर जाने की उम्मीद (Long Positions) लगा रखी थी।
संस्थागत निवेशकों का पलायन (Institutional Sell-off)
हाल तक बिटकॉइन को सहारा देने वाले अमेरिकी Bitcoin ETFs से भारी निकासी देखी गई है, सिर्फ दो दिनों में निवेशकों ने करोड़ों डॉलर मूल्य के फंड्स निकाल लिए हैं, जिससे बाजार का सेंटिमेंट ‘पैनिक’ की स्थिति में पहुंच गया है।
भू-राजनीतिक अस्थिरता (Geopolitical Tension)
वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी और ग्रीनलैंड को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय तनाव ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बना दिया है, ऐसे समय में निवेशक बिटकॉइन जैसी ‘रिस्की एसेट’ से पैसा निकालकर सोने (Gold) जैसे सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे हैं।
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फेडरल रिजर्व और केविन वार्स का डर
केविन वार्स को अमेरिकी फेडरल रिजर्व का अगला अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाओं ने आग में घी का काम किया है, बाजार को डर है कि वे ब्याज दरों में सख्ती (Hawkish stance) बरत सकते हैं, जिससे लिक्विडिटी कम होगी और क्रिप्टो जैसी संपत्तियों की चमक फीकी पड़ जाएगी।
‘क्रिप्टो विंटर’ की आहट
एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि बिटकॉइन $60,000 के सपोर्ट स्तर को मजबूती से नहीं थाम पाता, तो यह गिरकर $38,000 तक जा सकता है, इसी अनिश्चितता ने छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों को परेशान कर रखा है।
















