ग्रामीण भारत के लिए एक बड़ा तोहफा! केंद्र सरकार ने डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, NABARD सब्सिडी और डेयरी उद्यमिता विकास योजना शुरू की हैं। इनके तहत किसानों और युवाओं को 42 लाख रुपये तक का लोन और 25 से 33 फीसदी तक की सब्सिडी मिल रही है। कम निवेश में स्थिर आय का यह मौका लाखों परिवारों को आत्मनिर्भर बना सकता है। दूध उत्पादन बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

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सरकारी योजनाओं का धमाकेदार पैकेज
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत 25 दुधारू गाय या भैंस वाली डेयरी यूनिट के लिए कुल 42 लाख रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसमें अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को 33 फीसदी और सामान्य वर्ग को 25 फीसदी सब्सिडी दी जाती है। NABARD की पशुपालन योजना में एक गाय से शुरू करके 10 लाख तक की सब्सिडी और बैंक से कम ब्याज पर लोन की सुविधा उपलब्ध है। गोपालक योजना के तहत ग्रामीण युवाओं को 9 लाख रुपये तक का लोन मिल रहा है, जो उन्हें बेरोजगारी से निजात दिला रहा है। 2026 में ये योजनाएं पूरी तरह सक्रिय हैं और दूध उत्पादन को 20 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य स्तर पर भी पशुपालन विभाग इनका प्रचार-प्रसार कर रहा है।
पात्रता और बड़े लाभ
इस योजना का लाभ ग्रामीण युवा, किसान, बेरोजगार युवक और दूध संघों से जुड़े लोग उठा सकते हैं। न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए, साथ ही 3.5 एकड़ जमीन और डेयरी फार्मिंग की बेसिक ट्रेनिंग जरूरी है। पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर चयन होता है, जिसमें अधिकतम 200 पशु तक की 8 यूनिट बनाई जा सकती हैं। महिलाओं, एससी-एसटी वर्ग को अतिरिक्त प्राथमिकता मिलती है। लाभ में कम ब्याज लोन, सब्सिडी सीधे बैंक खाते में, मुफ्त ट्रेनिंग शिविर और दूध बिक्री की गारंटी शामिल है। एक 25 पशुओं वाली यूनिट से मासिक 1 से 2 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है, जबकि 10 गायों वाली छोटी यूनिट से 50 हजार रुपये महीना संभव है।
फॉर्म भरने की सुपर आसान प्रक्रिया
आवेदन NABARD की आधिकारिक वेबसाइट, राज्य पशुपालन विभाग या नजदीकी बैंक और दूध संघ के माध्यम से ऑनलाइन या ऑफलाइन किया जा सकता है। जरूरी दस्तावेजों में आधार कार्ड, बैंक पासबुक, निवास प्रमाण पत्र, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और पशु खरीद का अनुमान शामिल है। फॉर्म भरने के 15 से 30 दिनों के अंदर स्वीकृति मिल जाती है। ट्रेनिंग शिविर मुफ्त होते हैं और सब्सिडी 3 साल के लॉक-इन पीरियड के बाद रिलीज होती है। नजदीकी दूध संघ से संपर्क कर गाइडलाइंस और मदद ली जा सकती है। पूरी प्रक्रिया सरल और पारदर्शी रखी गई है ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हों।
क्यों है यह गोल्डन चांस?
डेयरी फार्मिंग से न सिर्फ आय बढ़ेगी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। दूध की मांग हमेशा बनी रहती है, इसलिए यह बिजनेस रिस्क-फ्री है। सरकार का लक्ष्य 2026 तक लाखों नए डेयरी उद्यमी तैयार करना है। अगर आप किसान हैं या गांव में रहते हैं, तो यह मौका हाथ से न जाने दें। आज ही नजदीकी बैंक या पशुपालन कार्यालय जाकर आवेदन शुरू करें और अपने सपनों का डेयरी फार्म खोलें। ग्रामीण भारत की ताकत यही है, छोटे कदम से बड़ी कमाई!
















