केंद्र सरकार ने बजट 2026 में इनकम टैक्स के दंड नियमों को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे करोड़ों करदाताओं को जेल जाने का डर हमेशा के लिए खत्म हो गया। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए नियमों के तहत मामूली चूक या तकनीकी गलतियों पर अब केवल जुर्माना लगेगा, लंबी कानूनी लड़ाई या जेल की सजा नहीं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे ईमानदार टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत बताते हुए कहा कि यह डिक्रिमिनलाइजेशन का ऐतिहासिक कदम है। पहले छोटी-छोटी गलतियों पर भी 7 साल तक की सजा का प्रावधान था, लेकिन अब सिस्टम को और मानवीय बना दिया गया है।

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नए दंड नियमों का पूरा खुलासा
पहले जहां आय में हल्की गड़बड़ी या टैक्स छिपाने को अपराध माना जाता था, वहीं अब ऐसे मामलों को आपराधिक श्रेणी से बाहर कर दिया गया। अधिकतम सजा को 2 साल तक सीमित करते हुए अदालत को अधिकार दिया गया है कि इसे जुर्माने में बदल सके। अगर टैक्स, ब्याज और 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स समय पर जमा कर दिया जाए, तो कानूनी कार्रवाई से पूरी छूट मिल जाएगी।
अपील के दौरान दंड पर लगने वाला ब्याज भी बंद हो गया है, जबकि जमा राशि की सीमा 20 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत कर दी गई। पुनर्मूल्यांकन के बाद रिटर्न में संशोधन करने पर मात्र 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स देकर मुकदमेबाजी से बचा जा सकता है। ये बदलाव टैक्स प्रक्रिया को तेज और सरल बनाते हैं, जहां दोहराव वाली कार्यवाहियां एक ही आदेश से निपटाई जा सकेंगी।
एनआरआई और आम करदाताओं को विशेष लाभ
एनआरआई को प्रॉपर्टी बेचते समय टीडीएस जमा करने में बड़ी आसानी हुई है, क्योंकि अब टीएएन नंबर की अनिवार्यता खत्म कर दी गई। छुपी हुई विदेशी आय या संपत्ति पर 1 करोड़ रुपये तक के मामलों में 30 प्रतिशत प्लस 30 प्रतिशत टैक्स देकर छूट मिलेगी, जबकि 5 करोड़ तक की संपत्ति पर सिर्फ 1 लाख रुपये शुल्क से मुक्ति।
छोटे टैक्सपेयर्स के लिए ऑटोमैटिक सिस्टम शुरू किया गया, जहां फॉर्म 15जी/एच को डिपॉजिटरी में सीधे जमा किया जा सकेगा। आईटीआर-1 और आईटीआर-2 की अंतिम तारीख 31 जुलाई रहेगी, जबकि संशोधन के लिए 31 मार्च तक समय मिलेगा। मोटर दुर्घटना मुआवजे पर मिलने वाले ब्याज को पूरी तरह टैक्स मुक्त कर दिया गया, टीडीएस कटौती भी समाप्त।
अर्थव्यवस्था और भविष्य पर प्रभाव
ये सुधार स्वैच्छिक टैक्स अनुपालन को प्रोत्साहित करेंगे, क्योंकि जेल के भय से मुक्ति मिलने से मध्यम वर्ग में विश्वास बढ़ेगा। हालांकि इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया, पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे टैक्स संग्रह में इजाफा होगा और अदालतों में लंबित मामले कम होंगे।
फिर भी गंभीर टैक्स चोरी पर कठोर जुर्माना लागू रहेगा, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है। नोटिस मिलते ही तुरंत सुधार करें, वरना परेशानी हो सकती है। यह बदलाव भारतीय टैक्स सिस्टम को पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। करदाता अब बेफिक्र होकर रिटर्न भर सकेंगे।
















