आजकल साइबर अपराधियों का नया जाल ‘डिजिटल अरेस्ट’ लोगों को डराकर लूट रहा है। ठग फोन या व्हाट्सएप पर खुद को पुलिस, सीबीआई या ईडी अधिकारी बताते हैं। वे वीडियो कॉल पर फर्जी दस्तावेज दिखाकर आपको गंभीर अपराध का आरोपी ठहराते हैं और पैसे मांगते हैं। पिछले साल देशभर में लाखों लोग इसका शिकार बने, जिनसे अरबों रुपये की ठगी हुई। यह स्कैम मध्यमवर्गीय परिवारों को खास निशाना बनाता है, जहां डर का फायदा उठाकर ठग सब कुछ हड़प लेते हैं।

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स्कैम कैसे फैलता है?
स्कैम का तरीका बेहद चालाकी भरा है। पहले एक अनजान नंबर से कॉल आता है। ठग ट्रैफिक चालान बकाया, मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स जैसे झूठे आरोप लगाते हैं। वे स्क्रीन पर फर्जी FIR, वारंट या कोर्ट ऑर्डर दिखाते हैं। फिर वीडियो कॉल पर आपको कैमरा ऑन रखने को कहते हैं और सख्त हिदायत देते हैं, परिवार से बात न करो, घर न छोड़ो वरना गिरफ्तारी हो जाएगी। घंटों या दिनों तक यह सिलसिला चलता रहता है।
अंत में ‘जांच पूरी करने’, ‘क्लीन चिट देने’ या ‘सुरक्षा जमा’ के नाम पर UPI, बैंक ट्रांसफर या क्रिप्टोकरेंसी में लाखों-करोड़ों रुपये मंगवा लेते हैं। पैसे मिलते ही वे फोन बंद कर गायब हो जाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर की जाती है, ताकि पीड़ित घबरा जाए और सोचे-समझे बिना पैसे दे दे।
चौंकाने वाले मामले सामने आए
हाल ही में मुंबई का एक 72 वर्षीय व्यापारी 40 दिनों तक ठगों के जाल में फंसा। वे उसे फर्जी पूछताछ में रखकर 58 करोड़ रुपये ऐंठ ले गए। दिल्ली में एक रिटायर्ड NRI दंपति से 17 दिनों की वीडियो निगरानी में 14 करोड़ लूटे गए। एक केस में MBA ग्रेजुएट और सीए स्टूडेंट तक गिरोह में शामिल पाए गए। 2024 में 1.23 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं, जिनसे 1900 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ।
इस साल के शुरुआती दो महीनों में ही 17 हजार से ज्यादा मामले और 210 करोड़ की ठगी रिपोर्ट हुई। महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली जैसे राज्यों में यह महामारी की तरह फैल रहा है। कुल मिलाकर साइबर फ्रॉड से पिछले साल 22 हजार करोड़ से ज्यादा गंवाए गए।
बचाव के सरल तरीके अपनाएं
इस घातक स्कैम से बचना आसान है, अगर थोड़ी सतर्कता बरतें। सबसे पहला नियम किसी अनजान कॉल पर न डरें, तुरंत फोन काट दें। खुद आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से नंबर चेक कर कॉल बैक करें। कभी भी OTP, बैंक डिटेल्स या पैसे न दें, क्योंकि वास्तविक पुलिस फोन पर पैसे नहीं मांगती। न ही वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का प्रावधान कानून में है। अगर शक हो, तो नेशनल हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या ऑनलाइन पोर्टल पर रिपोर्ट करें। जल्दी रिपोर्ट करने से 80 फीसदी तक पैसे वापस मिल सकते हैं। परिवार और दोस्तों को भी जागरूक करें।
सरकार और पुलिस की सख्ती
प्रधानमंत्री ने खुद ‘मन की बात’ में चेतावनी दी कि वीडियो कॉल से अरेस्ट नहीं होता। साइबर सेल ने हजारों फर्जी नंबर ब्लॉक किए हैं। ईडी और आई4सी सक्रिय हैं, कई अंतरराष्ट्रीय गिरोह पकड़े जा चुके। लेकिन असली हथियार है जागरूकता। डरें नहीं, सतर्क रहें। यह स्कैम रुक सकता है, अगर हर नागरिक सजग हो जाए।
















