
भाई, संपत्ति के बँटवारे की बात हो तो घर में हंगामा मच जाता है ना? खासकर बेटियों के हिस्से को लेकर। पुराने ज़माने में तो बेटा ही वारिस, बेटी तो पराया धन। लेकिन अच्छे दिन आ गए! अब कानून साफ़ कहता है – बेटी हो या बेटा, पिता की पैतृक संपत्ति में बराबर हक़। चाहे शादीशुदा हो या कुंवारी, जन्म से ही तुम्हारा अधिकार। 2005 का वो बड़ा बदलाव और सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सब पलट दिया। चलो, स्टेप बाय स्टेप समझते हैं।
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2005 का जादुई संशोधन
साल 2005 में हिंदू सक्सेशन एक्ट में धमाका हो गया। 9 सितंबर से लागू इस बदलाव ने बेटियों को ‘कोपार्सिनर’ बना दिया – यानी जन्म से पैतृक संपत्ति पर बराबर मालिक। पहले शादी होते ही बेटी का हक़ उड़ जाता था। अब नहीं! ये अधिकार जीवनभर रहता है। पिता चाहें तो कुछ न करें, लेकिन बेटी का हिस्सा तय है। सोचो, कितना बड़ा इंसाफ़!
सुप्रीम कोर्ट का 2020 वाला धमाल फैसला
फिर आया 2020 का विनीता शर्मा केस। सवाल था – क्या सिर्फ उन बेटियों को फायदा जिनके पापा 2005 में ज़िंदा थे? कोर्ट ने ठोक दिया – नहीं! बेटी का हक़ जन्मजात है, पापा की मौत की तारीख़ से कोई फर्क नहीं पड़ता। तीन जजों की बेंच ने साफ़ कहा: बेटा-बेटी बराबर। इस फैसले ने लाखों बेटियों के सपने पूरे कर दिए। अब कोई बहाना नहीं चलेगा!
दो तरह की संपत्ति
सबसे पहले समझ लो संपत्ति के टाइप। पहली, स्व-अर्जित – जो पापा ने अपनी मेहनत से कमाई। इस पर उनका पूरा राज़। वसीयत बना दें किसी को भी, बेटी दावा नहीं कर सकती। दूसरी, पैतृक – दादा-पड़दादा वाली, चार पीढ़ी पुरानी। इस पर बेटी-बेटे का जन्म से बराबर हक़। पापा बेच नहीं सकते बिना सबके मानने के। यही फर्क समझ लो, 80% झगड़े खत्म!
कब नहीं मिलेगा बेटी को हिस्सा?
हक़ है तो झगड़ा क्यों? कुछ केस में दावा खारिज हो जाता है। अगर पापा ने स्व-अर्जित प्रॉपर्टी वसीयत में किसी और को दे दी। या बेटी ने खुद रिलीज़ डीड साइन कर हिस्सा छोड़ा। पापा ने ज़िंदा रहते बेच दी तो bye-bye दावा। और अगर 2004 से पहले बँटवारा हो चुका, तो वो वैलिड। परिवार में बात कर लो पहले, वकील से सलाह लो। झगड़ा मत करो!
अपने हक़ की रक्षा कैसे करें?
कानून ने बेटियों को ताकत दी, लेकिन जागरूक रहो। वसीयत चेक करो, प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स रखो। विवाद हो तो कोर्ट जाओ, लेकिन पहले मीडिएशन ट्राय करो। ये बदलाव समाज को और समान बना रहा है। बेटियाँ अब आर्थिक रूप से मज़बूत। पापा-मम्मी, अपनी बेटियों को ये बताओ। हक़ लो, लेकिन प्यार मत खोना!
















