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Land Ownership: भारत में सरकार के बाद सबसे ज्यादा जमीन किसके पास है? आंकड़े जानकर हो जाएंगे हैरान, देखें टॉप-3 की लिस्ट

भारत में सबसे ज्यादा जमीन सरकार के पास है – करीब 15,500 वर्ग किलोमीटर! रेलवे, रक्षा और कोयला मंत्रालय लीड करते हैं। दूसरे नंबर पर कैथोलिक चर्च (7 करोड़ हेक्टेयर, 1 लाख करोड़ कीमत), तीसरे पर वक्फ बोर्ड (6 लाख प्रॉपर्टी)। ब्रिटिश काल की देन, आज विवादित। आंकड़े अनुमानित – पारदर्शिता जरूरी!

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Land Ownership: भारत में सरकार के बाद सबसे ज्यादा जमीन किसके पास है? आंकड़े जानकर हो जाएंगे हैरान, देखें टॉप-3 की लिस्ट

दोस्तों, सोचिए जरा – हमारा भारत इतना बड़ा देश है, जहां हर कोने में जमीन के लिए लड़ाई-झगड़े चलते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यहां सबसे ज्यादा जमीन किसके कब्जे में है? अगर नहीं, तो आज हम खोलकर रख देंगे सारी बात। सबसे ऊपर तो हमारी सरकार ही राज करती है जमीन के मामले में। उसके बाद कुछ ऐसी संस्थाएं हैं जो लाखों एकड़ पर कब्जा जमाए बैठी हैं। ये आंकड़े अनुमानित हैं, लेकिन चौंकाने वाले हैं। चलिए, जानते हैं।

सरकार का विशाल साम्राज्य

सबसे पहले बात करते हैं सरकार की। रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत सरकार के पास कुल मिलाकर करीब 15,500 वर्ग किलोमीटर जमीन है – यानी इतना बड़ा इलाका कि कई छोटे देश इसके सामने फीके पड़ जाएं। कतर या सिंगापुर जैसे देशों का साइज भी इसके आगे कम लगे। अब सोचिए, ये जमीन कहां-कहां बंटी है? सबसे ज्यादा हिस्सा रेलवे मंत्रालय के पास है – ट्रैक, स्टेशन, गोदाम, सब मिलाकर।

उसके बाद रक्षा मंत्रालय की बारी, जहां आर्मी कैंप, एयरबेस और नेवल बेस हैं। कोयला मंत्रालय भी पीछे नहीं – खदानें और कोलियरी जमीनें कवर करती हैं। कुल मिलाकर, सरकारी विभागों की संपत्ति देश की रीढ़ है, लेकिन रखरखाव का बोझ भी कम नहीं।

दूसरा नंबर: चर्च की अपार संपत्ति

अब आता है दूसरा बड़ा नाम – कैथोलिक चर्च ऑफ इंडिया। हां भाई, गैर-सरकारी संस्थाओं में ये टॉप पर है। अनुमान है कि उनके पास पूरे देश में 7 करोड़ हेक्टेयर से ज्यादा जमीन फैली हुई है, जिसकी कीमत 1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर बताई जाती है। ये जमीनें खाली नहीं पड़ीं – इन पर सैकड़ों अस्पताल, स्कूल और चर्च बने हैं, जो लाखों लोगों की सेवा करते हैं। लेकिन सवाल ये है कि इतनी जमीन कैसे मिली?

इतिहास का काला अध्याय

ये कहानी पुरानी है, 1927 के आसपास की। ब्रिटिश राज था तब, अंग्रेजों ने चर्च को जमीनें सस्ते दामों पर थमा दीं ताकि ईसाई धर्म फैले। स्वतंत्र भारत में 1965 में सरकार ने ऐसे पट्टों को रद्द करने की कोशिश की, लेकिन विवाद आज भी चलते रहते हैं। कोर्ट-कचहरी में केस लंबे खिंचते हैं। ये जमीनें अब भी चर्च के नाम दर्ज हैं, और कई जगहों पर दान या ट्रस्ट के रूप में चल रही हैं। इतिहास ने कमाल कर दिया, ना?

तीसरा दावेदार: वक्फ बोर्ड का दबदबा

तीसरे नंबर पर आता है वक्फ बोर्ड। ये एक स्वायत्त संस्था है, जो मस्जिदें, मदरसे, कब्रिस्तान और दान की गई संपत्तियों को संभालती है। पूरे भारत में उनके पास 6 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टीज हैं – छोटी-बड़ी। ये जमीनें धार्मिक कामों के लिए हैं, लेकिन कभी-कभी इनके मालिकाना हक पर भी सवाल उठते हैं। वक्फ बोर्ड खुद कहता है कि ये सब अल्लाह की संपत्ति है, लेकिन रिकॉर्ड में अव्यवस्था की शिकायतें रहती हैं। फिर भी, इसका नेटवर्क देशभर में फैला है।

आंकड़ों की सच्चाई और चुनौतियां

ये सारे आंकड़े रिपोर्ट्स और अनुमानों पर आधारित हैं – कोई आधिकारिक सर्वे अभी तक नहीं हुआ। सरकार, चर्च, वक्फ – सबके पास जमीनें हैं, लेकिन पारदर्शिता की कमी है। कभी जमाबंदी के झगड़े, तो कभी अवैध कब्जे। अब सरकार डिजिटल जमाबंदी ला रही है, ताकि वारिसों का नाम आसानी से दर्ज हो सके। लेकिन बड़े मालिकों की संपत्ति पर नजर रखना जरूरी है।

Author
info@gurukulbharti.in

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