
उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में नाम बदलने का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा। कल ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिरोजाबाद और हरदोई जिलों के दो गांवों के नाम बदलने की मंजूरी दे दी है। ये बदलाव इतने सहज लगते हैं जैसे कोई पुरानी किताब का नाम नया करके ताजगी ला दें। सरकार कह रही है कि ये फैसले स्थानीय लोगों की भावनाओं और सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने के लिए हैं। आइए, इसकी पूरी कहानी को करीब से समझते हैं, बिना किसी जल्दबाजी के।
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फिरोजाबाद का उरमुरा किरार बना हरिनगर
सबसे पहले बात फिरोजाबाद जिले की। यहां शिकोहाबाद तहसील के वासुदेवमई ग्राम पंचायत में आने वाला गांव उरमुरा किरार अब हरिनगर के नाम से जाना जाएगा। सोचिए, पुराना नाम सुनते ही कुछ लोग भौंहें चढ़ा लें, लेकिन नया नाम ‘हरिनगर’ तो जैसे हिरणों की हरियाली वाली तस्वीर खींच देता है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने खुद सोशल मीडिया पर इसकी आधिकारिक घोषणा की है। अब संबंधित अधिकारी नाम बदलने की कागजी कार्रवाई तेजी से पूरा करेंगे। स्थानीय लोग खुश हैं क्योंकि ये नाम उनके इलाके की पहचान से जुड़ता है। क्या पता, ये बदलाव गांव की नई शुरुआत का संकेत हो!
हरदोई में हाजीपुर का नया रूप: सियारामपुर
दूसरी तरफ हरदोई जिले के भरावन विकासखंड में ग्राम पंचायत हाजीपुर का नाम अब सियारामपुर हो गया है। भगवान राम और उनके भक्त हनुमान की भक्ति से ओतप्रोत ये नाम सुनकर दिल को सुकून मिलता है। योगी जी ने इसे मंजूरी दी, और तुरंत विभागों को आदेश जारी हो गए। सोचिए, गांव वाले अब सियारामपुर कहलाने पर कितना गर्व महसूस करेंगे। ये बदलाव सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में भी बस जाएगा। सरकार का तर्क साफ है – नाम ऐसे हों जो इतिहास और संस्कृति की गहराई छुएं।
योगी राज में नाम परिवर्तन की बड़ी लिस्ट
याद कीजिए 2017 जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने, तब से नाम बदलने का अभियान जोर पकड़ चुका है। इलाहाबाद को प्रयागराज बनाया, जो संगम की पवित्रता को सलाम करता है। फैजाबाद अब अयोध्या है, भगवान राम की नगरी के असली रंग में रंग गया। ये बदलाव कानूनी तरीके से हुए, जनता की मांग पर। हर बार सरकार कहती है कि पुराने नामों में कुछ कमी थी, जो ऐतिहासिक महत्व को कम कर रही थी। आजादी के बाद कई जगहों पर ऐसे नाम पड़े थे जो अब फिट नहीं बैठते। योगी सरकार इन्हें सुधार रही है, और लोग इसे सराहते भी हैं।
शहरों, स्टेशनों से लेकर बस स्टैंड तक बदलाव
ये सिलसिला गांवों तक सीमित नहीं। मुगलसराय अब पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर है, और रेलवे जंक्शन भी उसी नाम से चमक रहा। केंद्र सरकार की मंजूरी से ये हुआ। अंबेडकर नगर के अकबरपुर बस स्टैंड को श्रावण धाम कहा जाने लगा। भक्तों के लिए ये कितना खास है! आगे भी स्थानीय मांग पर ऐसे प्रस्ताव आ सकते हैं। सरकार स्पष्ट कहती है – बदलाव जरूरत और भावनाओं के आधार पर ही होंगे। ये कदम यूपी को अपनी जड़ों से जोड़ रहे हैं।
नाम बदलाव से क्या फायदा
अब सवाल ये कि इन बदलावों से क्या हासिल? सबसे बड़ा फायदा तो सांस्कृतिक जुड़ाव का। लोग अपने गांव या शहर से ज्यादा प्यार करेंगे। पर्यटन बढ़ेगा, इतिहास जीवंत होगा। लेकिन चुनौतियां भी हैं – नक्शे, दस्तावेज, साइनबोर्ड सब बदलने पड़ेंगे। खर्च तो होगा, लेकिन सरकार कहती है ये एकमुश्त निवेश है। विपक्ष कभी-कभी इसे राजनीति कहता है, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि ज्यादातर लोग समर्थन में हैं। भविष्य में और गांव या कस्बे लाइन में हो सकते हैं।
आगे की राह: और बदलाव संभव?
योगी सरकार का ये अभियान जारी रहेगा। अगर कोई गांव वाला आवाज उठाए कि नाम पुराना लगता है, तो प्रस्ताव बन सकता है। मुख्यमंत्री कार्यालय सोशल मीडिया पर सक्रिय है, अपडेट्स मिलते रहेंगे। ये बदलाव यूपी को नई ऊर्जा दे रहे हैं। आप क्या सोचते हैं? नाम बदलना सही है या पुराने को संभालना चाहिए? कमेंट्स में बताएं। कुल मिलाकर, हरिनगर और सियारामपुर जैसे नाम यूपी की मिट्टी की खुशबू फैला रहे हैं।
















