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SC Decision: पैतृक संपत्ति बेचना अब नहीं होगा आसान! सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, लेनी होगी इनकी सहमति

सुप्रीम कोर्ट ने नियम बदल दिया - बिना सबकी सहमति कोई नहीं बेच पाएगा जमीन! बेटियों का हक भी पक्का। क्या आपकी फैमिली का घर खतरे में? अभी पढ़ें पूरा फायदा-नुकसान!

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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पैतृक संपत्ति के बिक्री नियमों को सख्त कर दिया है। अब परिवार के हर सदस्य की मंजूरी बिना कोई सौदा पूरा नहीं हो सकेगा। यह बदलाव पारिवारिक एकता को मजबूत करने और विवादों को रोकने के लिए लाया गया है।

SC Decision: पैतृक संपत्ति बेचना अब नहीं होगा आसान! सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, लेनी होगी इनकी सहमति

अविभाजित संपत्ति पर पाबंदी

पहले एक सदस्य अकेले पैतृक जमीन या मकान बेच सकता था, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं। अगर संपत्ति का बंटवारा नहीं हुआ है, तो सभी वारिसों को लिखित सहमति देनी पड़ेगी। इससे मनमाने फैसले रुक जाएंगे और हर कोई अपने हक के प्रति सतर्क रहेगा। यह नियम खासतौर पर उन परिवारों के लिए राहत है, जहां भाई-बहन आपस में झगड़ते रहते हैं।

बेटियों का बराबर अधिकार सुनिश्चित

नया फैसला बेटियों को पुरुष भाइयों के बराबर हिस्सा देता है। हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत बेटियां जन्म से ही सह-मालिक होती हैं। शादी के बाद भी उनका हक बना रहता है, चाहे पिता जीवित हों या नहीं। कोर्ट ने साफ कहा कि बिना बेटी की सहमति कोई बिक्री वैध नहीं मानी जाएगी। इससे लैंगिक समानता को बल मिला है।

विभाजित संपत्ति पर आजादी

अगर संपत्ति पहले ही बंट चुकी है, तो हर वारिस अपने हिस्से पर स्वतंत्र फैसला ले सकता है। यह हिस्सा अब निजी संपत्ति की तरह माना जाएगा, जिसे बेचना, गिफ्ट करना या वसीयत में देना आसान है। लेकिन बंटवारे के लिए कोर्ट या रजिस्ट्रार के पास जाना जरूरी है। इससे व्यक्तिगत जरूरतों का ख्याल रखा जा सकेगा।

माता-पिता और आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा

माता-पिता को अब बच्चों की लापरवाही पर संपत्ति से बेदखल करने का अधिकार मिला है। वरिष्ठ नागरिक कानून के तहत देखभाल न करने पर यह कदम उठाया जा सकता है। इसी तरह, आदिवासी महिलाओं को भी पैतृक हिस्से में समान अधिकार दिया गया। ये प्रावधान कमजोर वर्गों को मजबूत बनाते हैं।

बिक्री प्रक्रिया में सावधानियां

केवल बिक्री समझौता पर्याप्त नहीं; पंजीकृत दस्तावेज ही मालिकाना हक तय करेगा। विवादित संपत्ति पर 12 साल की समय सीमा भी लागू है। इन नियमों से फर्जीवाड़ा रुकेगा। संपत्ति खरीदने वालों को दस्तावेजों की गहन जांच करनी चाहिए।

परिवारों के लिए व्यावहारिक सलाह

यह फैसला लाखों परिवारों को प्रभावित करेगा, विशेषकर गांवों में। सभी सदस्यों से बातचीत करें, वकील से सलाह लें और कागजात सुरक्षित रखें। पारिवारिक विश्वास बनाए रखें तो संपत्ति पीढ़ियों तक सुरक्षित रहेगी। विवाद आने से पहले रोकथाम ही सबसे अच्छा उपाय है।

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info@gurukulbharti.in

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